सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 270, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२६० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
८६--३० वें अंश को अति क्रमण करने वाले ग्रहों की दशा में मरण हो ( जा० पारि० )। ही ८७--६, ८ घर में स्थित शत्रु ग्रह से दृष्ट पाप राशि में पाप ग्रह हो तो अपनीः अंतर्दशा में विजित ग्रह की दशा में मरण होगा ( जा० पारि० ) 1
८८--जो ग्रह नीच में हो उस ग्रह की तीसरी दशा मृत्यु पद है । जो ग्रह शत्रुगृही हो उस ग्रह की ५ वीं दशा मृत्यु प्रद है ।
जो ग्रह सूय के साथ अस्त हो उस ग्रह की ८ वीं दशा मृत्युप्रद है । ये दशाएँ पाप ग्रह सम्बन्धी हों तो निश्चय मरण हो ( जा० पारि० ) ।
८९--छिद्र ग्रह ७ हुँ (१) अष्टमेश, (२) अष्टम स्थित ग्रह, (३) अष्टम को देखने वाला ग्रह, (४) खरेश्वर (खर द्रेष्काण जन्म लग्न का २२ वाँ द्रेष्काण है या आठवें भाग का लग्न तुल्य द्रेष्काण खर द्रेष्काण कहलाता है । इसका स्वामी खरेश्वर हुआ । ) अष्टमेश युक्त ग्रह, (६) चतुःषष्ठि (६४) अंश का स्वामी (जन्म काल में जो चन्द्रमा का नवाँश हो उसका ६४ वाँ अंश ) (७) अष्टमेश का अति शत्रु इन सातों में जो वली हो उसकी दशा में, मृत्यु होगी । उस भाव के व्ययस्थ या उस भाव के व्ययेश इन दोनों में बलवान् ग्रह की दशा में मृत्यु होती है । छर्न में यदि द्वितीय द्रेष्काण है तो अष्टम का द्वितीय द्रेष्काण खर कहलाया । खरेश्वर मारक ग्रह होता है । चन्द्र जिस नवांश पर हो उससे ६४ वां नवांश खर होता है ( जा० पारि० )। ९०--गुलिक स्पष्ट के उदित नवांश में गुरु के आने पर, उसके द्वादशांश में शनि के आने पर, द्रेष्काण कोण घर में सूर्य आने पर, लग्न चन्द्र गुलिक युक्त राशि अंश गत सूये में मृत्यु हो ( जा० पारि० )। ९१- खन स्पष्ट और गुलिक का योग करने पर जो राशि आवे उसमें जिस राशि का नवांश हो उस राशि की संख्या वरावर मास में मृत्यु जानना । जैसे योग राशि में वृष का नवांश हो तो २ मास कन्या का नवांश हो तो ६ मास आदि । इसी प्रकार गुलिक और चन्द्रमा के योग से योग तुल्य राशि में जब चन्द्रमा आवे तब मरण हो ।
एवं लग्न गुलिक और चंद्र के योग वाले राशि का मरण समय का लग्न जानना ( जा० पारि० ) ।
९२--गुरु स्पष्ट को ९ से गुणा करो उसमें ९ गुणित शनि और गुलिक जोड़ो । फिर उसमें शनि और गुलिक ९ गुणित जोड़कर उस समस्त योग को गुरु में जोड़ो । उस योग राशि के नवांश राशि में गोचर का गुरु जाने पर मृत्यु होगी । (जा० पारि०)। ९३--९ से गुणित स्पष्ट सूर्य में शनि और गुलिक को ९ से गुणा कर जोड़ो फिर उसमें ९ गुणित गुलिक जोड़ो । उस योग राशि में जिसका नवांश हो उस राशि में जब गोचर का सूर्य जायगा तब मृत्यु होगी । इससे मरण का मास ज्ञात होता है । ९४--चंद्र स्पष्ट को ९ से गुणा करे शनि और गुलिक को ९ से गुणा करें एकत्र