सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २६१
जोड़ कर फिर ९ से गुणा किये, गुलिक को जोड़ने से जो राशि हो उसके नवांश में चन्द्र हो तब मृत्यु होगी ( जा० पारि० )1 ९५--दिन का जन्म हो तो सूर्य स्पष्ट और शनि के योग से जो नक्षत्र हो वही मरण की प्रथम दशा होगी । अर्थात् उस नक्षत्र में जो विंशोत्तरी ग्रह की दशा आवे उस दशा में मृत्यु हो । यदि रात्रि का जन्म होतो चन्द्र और राहु के योग से जो नक्षत्र मिले उसकी प्रथम दशा मरण की होगी । राशि से नक्षत्र का ज्ञान कर लेना (जा० पारि०)। ९६--लग्नेश व जन्म राशीश अस्तंगत होकर ६,८.१२ भाव में जिस राशि में हो उस राशि की संख्या तुल्य वर्षों में मरण हो--जैसे मेष राशि--१ वर्ष, मकर--१० वर्षे आदि ( जा० सं० ) ।
९७--प्रह जो लग्न द्रेष्काण का स्वामी हो या चन्द्र द्रेष्काण का स्वामी हो और ६.८.१२ घर में हो तो द्रेष्काण की राशि सूचक महीनों में वाल मृत्यु हो (फल०) । ९८--ग्रह जो चन्द्र नवांश का स्वामी या लग्न नवांश का स्वामी ६,८,१२ घर में हो तो उस स्वामी की राशि सूचक दिनों में मृत्यु होगी (फल०) । ९९---मंद अंश, मांद अंश, राहु, खरांशेश, अष्टमेश और इनके नवांशेश जो ग्रह उनमें निर्वेल ग्रह की दशा में मृत्यु होती है ( स० चि० ) ।
१००--लग्नेश षष्ट स्थान गें जिस राशि में हो उस राशि की जो संख्या हो उतने वर्ष में अरिष्ट हो ( प्रा० यो० ) !
१०१--लग्न का द्रेष्काण या नवांश का स्वामी पष्ठ स्थान में जिस राशि में हो उस राशि की जो संख्या हो उतने वर्ष में अरिष्ट हो ( प्रा० यो० )1
१०२-छग्नेश अस्तंगत हो, अष्ठमेश लग्न को देखता हो तो जिस राशि में वह हो उस राशि की संख्या समान वर्ष में अरिष्ट हो ( प्रा० यो० )। १०३--कितने वर्ष में अरिष्ट होगा १--छूम्न में राहु व केन्द्र में चन्द्र हो शीघ्र । २--शनि के घर सूयं, सूर्य के घर शनि हो शीघ्र । ३--लग्न में शनि व षष्ठ में चन्द्र हो १० दिन में। ४-ऱवुध षष्ठ या अष्टम में हो ४ वर्ष में । ५--क्रूर ग्रह का लग्न हो लग्नेश अस्तंगत हो ८ वषं में । ६--मंगल के घर गुरु, गुर् के घर मंगल हो १० वर्षे में । ७--जग्न से सप्तम में राहु हो तो १० वपं में । ८--अष्टम में राहु चन्द्र से दुष्ट हो तो १० बर्ष में । ९-लग्न से १० भाव में राहु हो तो १६ वपं में (प्रा० यो०) । १०४---जिन अरिष्टो में मरण का समय नहीं दिया उन अरिष्टकारक योगों में जो अधिक बलवान् हो वह बलवान् ग्रह जन्म कुंडली में जिस राशि में हो उस राशि में जब चन्द्र प्रवेश करता है तब मृत्यु होती है। या जम्म कुंडली में जिस राशि में चन्द्र
हो उसी राशि पर जब चन्द्र फिर आता है तव मृत्यु होगी । या १ वर्ष के भीतर उन अरिष्ट योगों के स्थानों में जाकर जब चन्द्र वलवान् हो और पाप दृष्ट हो तब मृत्यु होती है ।
यहाँ मृत्यु समय जानने के अनेक योग दिये हैं जिससे कई प्रकार से समय का “विचार हो सके एक से अधिक प्रकार से विचार में जो निर्णय हो और ग्रहों का