सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 277, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे मारक स्थान £ २६७
यह होगा । (४) लग्नेश, वुध, गुरु, शुक्र व चंद्र नीच के अस्तंगत, पराजित, पापाक्रान्त,
वक्री, अनुवक्री आगे वक्री होने वाला हो और ६,८,१२ घर मे हो तो चोर दुःख,
पीड़ा, दरिद्र रोग, वस्त्रहीन, शत्रु पीड़ा व भ्रमण आदि अपनी दशा मे करेंगे
( प्रा० यो० ) ।
शत्रुओं के बीच मरण-- (१) ६,८,९ इन तीनों भाव मे' पाप ग्रह हो तो शत्रुओं
के मध्य निश्चय मरण हो ( जा० सं० )।
शत्रुओं के दोष से मरण--पाप ग्रह दशम मे और चतुर्थ मे हो, क्षीण चन्द्र ६
या ८ भाव मे हो तो यात्रा के समय शत्रु के दोष से मरण हो ( जा० पारि० ) ।
विष या शस्त्र से व रक्त प्रकोप से मरण--द्वितीय मे मङ्गल हो (जा० ल॑०) ।
तलवार से कटे--(१) मकर पर मङ्गल और कक पर शनि हो तो चोर विधि
से तलवार से कट जाता है ( जा० सं० )। (२) लग्न मे शनि और मङ्गल हो सूर्य
सप्तम हो तो तलवार से मृत्यु ( जा० सं० )। (३) चतुर्थ मे पाप ग्रह और गुरु
दशम मे हो तो तलवार के प्रहार से मृत्यु ( जा० सं० ) । (४) चन्द्र शनि एक साथ
या अलग-अलग वृष या तुला राशि मे हों तो २८ वें वर्ष मे तलवार द्वारा मृत्यु ।
वज्च से मृत्यु--(१) मिथुन, मीन, धनु, कुम्भ इन राशियों में पाप ग्रह हो तो बुरे
आचरण से वज् द्वारा मृत्यु हो ( जा० सं० ) ( शंभु० ) । अर्थात् शरीर पर बिजली
गिरने से मृत्यु हो ।
भीत से या वज्ञ से मृत्यु-- (२) १,५,८,९ इन भावों में क्रम से सूयं, शनि, मङ्गल
चंद्र हों तो बिजली गिरने या शिर पर से गिरने या भीत गिरने से मृत्यु हो ( जा०
सं० ) । लग्न से अष्टम या त्रिकोण में सूर्य, शनि, चन्द्र, मङ्गल हो तो शूल से, वस्त्र
से या दीवाल गिरने से मृत्यु हो ( जा० पारि» )।
बिजली, विष, सपं या व्याघ्र से म.त्यु-लग्न से ६ व ८ घर में बुध व चन्द्र हो
तो बिजली से या बिष, सपं से या बाघ से मरे ( प्रा० यो० ) ।
पर्वंत से गिर कर या वज्र से दीवाळ में दवकर मृत्यु--लग्न में सूर्य, पंचम
मंगल, अष्टम शनि, नवम चन्द्र हो तो पर्वत के शिखर से गिरने या दीवाल से दबकर
या विजली से मृत्यु हो ( वृ० जा० ) ।
वृक्ष से या वज से मृत्यू--लग्न में सूर्य, पंचम शनि, अष्टम चन्द्र, नवम मंगल
हो ( जा० पारि० ) |
पहाड़ से गिरने से मृत्यु--दशम और चतुर्थ में क्रम से सूर्य और मंगल हो तो
पर्वत शिखर से गिरने से मृत्यु हो ( जा० सं० ) ।
वृक्ष, वज्ञ, पर्वंत शिखर, घन, हलाग्र के प्रकार से--लग्न में शनि सूर्य के आश्रित
हो ५,८ भाव में मङ्गल, ९ भाव में चन्द्र हो ( जा० सं० ) । र
पत्थर की चोट से मृत्यु--जन्म से दशम सूर्य चतुर्थ मङ्गल हो तो पत्थर की चोट
से मत्यु हो ( वु० जा० ) ।
पत्थर काष्ठ चौपाये या वृक्ष से गिर कर या जल में डूबकर-शनि, राहु छठे भाव