भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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२६८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

में हो तो उसका मामा अपुत्र हो और काष्ट व पत्थर की चोट से या चौपाये से या चृक्ष से गिर कर या जल में डूब कर मृत्यु ( शंभू० ) । फिला कोट पहाड़ या जंगल में मृत्यु--दशम, सप्तम, चतुर्थ में क्षीण चन्द्र, शनि, मङ्गल क्रम से हों तो किले कोट या पहाड़ या जंगल में मरे (जा० सं०) । यात्रा में गिर जाने से व शस्त्र दोष से मृत्यु--चतुर्थे और दशम में पाप ग्रह और त्रिक में क्षीण चन्द्र हो तो यात्रा में गिर जाने से व शस्त्र दोष से मरे (जा.सं.)। ` आकस्मिक घटना रेल आदि में कई व्यक्तियों के साथ मृत्यु--(१) लग्नेश, अष्ट￾मेश एक साथ तथा अन्य ग्रहों के साथ भी हो या अष्टमेश एक से अधिक ग्रहों के साथ हो या अष्टम में कई ग्रह हों तो आकस्मिक घटना रेल, जहाज, खान, भूकम्प आदि से. कई व्यबितयो के साथ नृत्यु हो । (२) अष्टम में कोई पाप ग्रह हो यह पाप ग्रह मङ्गल के नवांश में हों और कूर षष्ठ्यंश में हों तो संघ मरण ( भीड़ में कई लोगों के साथ मरण ) (सर्णच०) । (३) सब शुभ ग्रह नीच, शत्रु गृही, अस्त, ग्रह युद्ध में पराजित पाप नवांश में और पाप युक्त हों तो वह कई मनुष्यों के साथ मरे (स० चि० ) । (४) जब शनि राहु और सुर्य अष्टमेश से दृष्ट होकर क्रूर अंश में हो और अस्त हों तो दसरों के साथ मरे ( स० चि० ) । ये पाप ग्रह सूर्य, मङ्गल, शनि लेना । संघ में अर्थात्‌ कई आदमियों के साथ या लड़ाई में या आग, पानी, भूडोल आदि से कई लोगों के साथ मृत्यु होगी ।

जलने से शस्त्राघात बंधन आदि से मृत्यु--क्षीण चन्द्र दशम, मङ्गल नवम, शनि लगन में, सूर्य पंचम हो, तो धैर्य से प्राण त्यागे अग्नि से जलना, रस्सील्ये-लिा, लकड़ी से मारना, शस्त्र की चोट आदि से मृत्यु हो ( प्रा० यो०)। ° डंडे की मार से मरण--(१) चतुर्थं या दशम में क्षीण चंद्र मंगल युक्त हो और शनि से दुष्ट हो तो डंडे या लाठी की मार से मृत्यु हो (सा० सं०) । (२) चतुर्थं या अष्टम में क्षीण चंद्र हो सप्तम में शनि, द्वितीय में मङ्गल हो तो काष्ठ प्रहार से मृत्यु हो (जा.सं.) । (३) लग्न में शनि, चतुर्थ में सूर्य, अप्टम में क्षीण चंद्र, दशम में मङ्गल हो तो लाठी की चोट से मृत्यु (जा०सं० ) (बृ०जा०)। (४) दशम में मङ्गल, चतुर्थ में सूर्य, क्षीण चन्द्रमा शनि से दृष्ट हो (जा०भ०) । (५) दशम मङ्गल चतुथ सूर्य हो उस पर शनि की दृष्टि हो (वृ०्जा०) ।

काष्ठ के ढेर में दवकर मरे--शनि अष्टम, क्षीण चंद्रमा दशम, सूर्य चतुर्थ हो तो - काष्ठ की ढेर में दवकर मरे (जा०पारि० )। कैद में मरे (१) सप्तम में सूर्य राहु केतु से युक्त हो और अष्टम में शुक्र हो खग्न में पाप ग्रह हो तो बंधन से मरण हो (जा०सं०) । (२) चन्द्र या लग्न से नवम पंचम भाव में पाप ग्रह हो और अष्टम में मङ्गल हो तो उद्देग व वंधन आदि से मरण हो (जा०सं०) । (३) पाप ग्रह नवम या पञ्चम में हो शुभ ग्रह युक्त व दृष्ट न हो तो कंद में मरे (जा०सं०) (वृ०्जा०) । (४) जन्म लग्न से अष्टम स्थान में पाश किंवा सपं व तिगड़ द्रेष्काण हो तो कंद में मरे (वृ०पा०)। (५) चन्द्रमा अष्टम में हो