सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
शुक्र की-स्त्री के आभूषण बनाने में चतुर, श्रेष्ठ कमं और धर्म में निरन्तर
तत्पर, स्त्रियों में आसक्त चित्त ।
(४) ककं के शनि पर दृष्टि
सूर्य की-आनन्द स्त्री और धन से हीन, अन्न भोग से हीन,माता को क्लेशदायक ।
चन्द्र की-बन्धु जनों तथा माता को दुःख देने वाला, धन की वृद्धि सहित ।
मंगल की-वल से हीन, क्षीण देह, राजा के दिये धन से वैभव ।
बुध की-वाग्विलांस में कठिन, भ्रमण करने में बुद्धि, मनोवांछित फल प्राप्त,
पाखंड करने में चतुर ।
गुरु की-धरती, पुत्र घर स्त्री, धन, रत्न, वाहन, आभूषण से युक्त । उ
शुक्र की-उदार, गौरव युक्त, सुन्दर यान युक्त, सोन्दयं तथा निर्मल वाणी
विलास से हीन ।
(५) सिह के शनि पर दृष्टि
सूर्य की-धन, अन्न, वाहन से श्रेष्ठ वृत्ति से सत्य और उत्तम चरित्र से हीन ।
चन्द्र की-श्रेष्ठ रत्न, आभूषण, वस्त्र, सुन्दर यश, स्त्री, मित्र, पुत्रादिकों के सुख
में पूर्ण प्रसन्न चित्त ।
मंगल की-संग्राम कर्म में अत्यन्त निपुण, करुणाहीन, क्रूर स्वभाव । बुध की-धन, स्त्री, पुत्र के सुख से हीन, दीनता युक्त, नीच व्यसनों से युक्त । गुरु की-भ ८्ठ मित्र, पुत्रादि युक्त, गुणों सहित, प्रसिद्ध, श्रेष्ठ वृत्ति वाला $
निरन्तर नम्रता सहित, पुर और ग्राम का स्वामी ।
शुक्र की-धन, अन्न और वाहन से युक्त, स्त्री से संताप को प्राप्त ।
(६) गुरुक्षेत्री शनि पर दृष्टि का फल
सूर्य की-प्रसिद्धि, धन एवं गौरव को प्राप्त करने वाला, पराये पुत्र में प्रीति । चन्द्र की-श्रेष्ठ वृत्ति, माता रहित, अन्य नामों से शोभित, धन, पुत्र, स्त्री के सुख भोगने वाला ।
मंगल की-बातरोगी, मनुष्यो के विपरीत चलनेवोला, परदेशवासी । बुध की-श्रेष्ठ गुणों से युक्त, धनवान्, कामी, राजा से वड़े अधिकार को प्राप्त, सदाचार युक्त ।
गुरु की-मंत्री या सेनापति, सव कार्यों को करने वाला, बलवान् सुशील । शुक्र की-परदेश वासी, बहुत कार्यों में आसक्त, दो माता, निरन्तर पवित्र । (७) स्वक्षेत्री शनि पर दृष्टि का फल सूर्य की-बुरे रूप वाली स्त्री का पति, पराया अन्न खाने वाला, अनेक प्रयास सहित, रोगयुक्त, परदेश वासी ।
चन्द्र की-धन ओर स्त्री युक्त, दुःख से उत्पन्न हुआ, चपल स्वभाव, माता के विरुद्ध रहे, कामातुर ।