सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 31, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों की दृष्टि का फल : २३
मंगल की-शूरवीर, क्रूर, अच्छे गुणों से युक्त, सवंजनों में उत्कृष्ट, सदा प्रसन्न
चित्त, प्रसिद्ध ।
बुध की-श्रेष्ठ वाहन युक्त, उत्साह युक्त, वलवान्, अनेक कार्यों में आसक्त ।
गुरु की-गुण युक्त, राजा का मन्त्री, रोग रहित, सुन्दर शरीर ।
शुक्र की-कामातुर, नियम रहित, भाग्य सहित, सुखवान्, धनवान्, भोग भोगने
वाला, लक्ष्मी का स्वामी ।
शनि पर पाप दृष्टि-वगल में रोग, बन्धन तथा क्षय हो।
शनि पर शत्रु दृष्टि-शत्रु वाधा, पराभव तथा रोग ।
शनि पर शुभ दृष्टि-रोग रहित ।
शनि पर मित्र दुष्टि-बांधवों से संगम होता है ।
दुष्टि का अन्य बिचार |
राहु दृष्टि से पाप नाश-छग्न या लग्न से ३-६-११ इन स्थानों को राहु देखता
हो तो उसके पाप का नाश होता है ( प्रा. यो. ) ।
चन्द्र की बुरी दृष्टि-लग्न पर चन्द्र की दृष्टि बुरी होती है । परन्तु कक लग्न
से उस पर चन्द्र हो तो फल अच्छा होता है ( प्रा. यो. ) ।
चन्द्र पर दृष्टि-दिन का जन्म हो चन्द्र दृश्य भाग में हो उसे ग्रह देखता हो तो
अशुभ फल ।
दिन का जन्म हो चंद्र अदृश्य भाग में हो उसे ग्रह देखता हो तो शुभ फल ।
रात का जन्म हो चंद्र दृश्य चक्र में हो तो शुभ फल ( प्रा. यो. ) ।
भाव या ग्रह सव ग्रहों से दृष्ट-जो भाव या ग्रह समस्त ग्रहों से दृष्ट हो वह
भाव ग्रह शुभ फल देने में समर्थ होता है ।
लग्न या चंद्र पर सब ग्रहों की दृष्टि-यदि जन्म में लग्न या चंद्र सब ग्रहों से
दृष्ट हो तो राज्य देने वाले होते हैं ।
लग्न सबसे दृष्ट-छग्न को सब ग्रह देखें तो वह कुल में श्रेष्ठ राजा होता है शत्रु
हन्ता, विलासयुक्त, सुखी, भाग्यवान्, बलवान् और दीर्घायु होता है ।
चंद्र सबसे दुष्ट-चन्द्र पर सव ग्रहों की दृष्टि हो तो राजकुल में उत्पन्न राजा
होता है अन्य अपने कुल में श्रेष्ठ धन अन्न ओर नीति कुशळ होता है (शंभु होरा०) ।
सूर्य लग्न में हो या लग्न पर पूर्ण दृष्टि हो तो क्रोधी, शरीर में बात पित्त रोग से
पीड़ा, पाषाण आदि प्रहार से कष्ट, कंठ या गुदा में ब्रण या तिल । बालपने में अनेकों
पीड़ा दुःख होते हैं ( जा० सं० ) ।
शुभ ग्रह लग्नेश होकर लग्न को देखे या लग्न में हो-बिना क्लेश बड़ी आयु पावे
और सुखी होता है ( जा० सं० ) ।
लग्न पर ग्रह दृष्टि फल
लग्न पर सूर्य दृष्टि--राज सेवी, पितृषन से धनी ।