भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

लून पर चन्द्र दृष्टि--जळू या जळचरों के व्यवहार से या रोजगार से धनी ।

रूगत पर मंगल दृष्टि--धर्मात्मा, स्थूल लिंग ।

लग्न पर बुध दृष्टि--विद्वान, शिल्पज्ञ तथा यशस्वी ।

रूग्न पर गुरु दृष्टि--राजा का पूज्य और व्रत युक्त ।

लग्न पर शुक्र दृष्टि--वेश्याओं में आसक्त, सुखी, धनी ।

लग्न पर शनि दृष्टि--वृद्धा स्त्री वाला, खल, मलिन ।

लग्न को कोई ग्रह न देखे तो लग्नस्थ ग्रह के वश से फल कहे ( जा० पारि० ) ।

लग्न पर दृष्टि फल

लग्न को लग्नेश देखे--राजा या राजा का प्रिय, धनी, सुखी हो ।

लग्न को शुभ ग्रह देखे--सव शुभ फल ।

लग्न को पाप ग्रह देखे--अशुभ फल ।

लग्न को दो आदि ग्रह देखे-सुखी ।

लग्न को सब ग्रह देखें--राजा हो ( जा० परि० )

` होरादि कुण्डली में चन्द्र पर ग्रहों की दृष्टि का फल

चन्द्र जिस राशि के होरा में हो उसे होरा स्थित ग्रह देखे तो णभ फल देगा ।

जैसे चन्द्रमा यदि सूर्य होरा में हो और सूय होरा स्थित ग्रह देखें तो शुभ ।

| चन्द्र 1 चन्द्र ss 12 1)

लग्न पर दृष्टि--इसी प्रकार लग्न में भी होरेश का फल विचारना ( वृ० जा० )

यदि लग्न में चन्द्र होरा हो और चन्द्र उपे देखें तो शुभ, सूर्य का होरा स्थित ग्रह देखे

तो शुभ, यदि चन्द्र अपने होरा में हो या दूसरे ग्रह सूर्य के होरा में होकर उसे देखे तो

अशुभ फल होता है ( प्राण यो० ) 1

द्रेष्काण कुण्डली में भी ऐसा ही विचार

जिस द्रेष्काण में चन्द्र हो उसी द्रेष्काण राशि के स्वामी से चन्द्र देखा जाय तो शुभ

फल होता है।

उसी प्रकार द्वादशांश निशांश व नवांश आदि में विचारना ।

द्वादशांश का फल--द्वादशांश फल के लिए-पहिले जो मेधादि राशि गत चन्द्र पर

दृष्टि का फल कहा है वही फल इसमें भी विचारना ।

नवांश में फल--इसी प्रकार चन्द्र पर जों सूर्यादि ग्रहों का फल कहा है वही फल चवांश राशि के अनुसार भी समझना ( वृ० जा० )