सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय २
अनेक ग्रहों के एक राशि में होने का फल
३ ग्रह योग
(१) सूयं चन्द्र-क्रूर कमं में निपुण, घमण्डी, पत्थर के यन्त्र आदिकों के व्यापार में
चतुर, निरन्तर कामी ( शंभु० )। अनेक प्रकार के यन्त्र बनाने वाला, पत्थर के काम
करने वाला ( वृ० जा० ) स्त्री के वश रहें, कपट कमं कर्ता, बड़ा उद्धत, काम करने
में बड़ा अदृढ़, पराक्रमी और अल्प मन वाला ( मान० ) । पत्थर और यन्त्रों को बेचने
वाला, माया में चतुर, कामी, चाहना सहित, अभिमानी ( जा० भ० )।
सूर्य मंगल--उत्तम धमं कमं तथा धन से हीन रहे, क्लेशों में तत्पर, निरन्तर
क्रोध युक्त ( शंभु० ) । पापी ( वृ० जा० ) । तेजस्वी, पाप में मन,मिथ्याभाषी, बड़ा
मूखं, भाई बन्दो से प्रेम करने वाला, वड़ा बलवान ( मान० ) । बड़ा यश, बलवान्,
मूर्ख, अतिशय उद्धत, झूठ बोलने वाला, साहसी, शुरवीर , ( जा० भ० )
सूर्य बुध--प्रिय वाणी, राजमस्त्रो, सेवा से धन कमावे, शास्त्रों में तत्पर, कलाओं
'के समूह में चतुर ( शंभु ) । सब कार्यों में निपुण, बुद्धि यश सौख्य युक्त (वु० जा०) ।
बड़ा विद्वान, राजाओं से मान प्राप्त, देव ब्राह्मण सेवा में मन, प्रियभाषी, यशस्वी,
स्थिर धन से युक्त ( मान० ) प्यारी बोली, मंत्री, बहु सेवा कर धन इकट्ठा करने
वाळा, कलाओं में कुशल, शास्त्रों में चतुर ( जा० भ० )। सूर्य बुध एक साथ
होने से बुधादित्य योग होता है वह धर्मात्मा पण्डित धनवान् बहुपुन्नवान् और सेवकों
सहित्त तथा जितेन्द्रिय होता है ( जैमिनि० )।
सूर्य गुरु--पुरोहिताई में चतुर, राजा का मन्त्री, भित्रों से पाये धन से
सम्पन्न, चतुराई से युक्त, उपकारी (शंभु०)क्र्र स्वभाव, निरन्तर पराये कर्म में तत्पर
(वृ० जा०), राजाओं से सत्कार प्राप्त, स्वधमं में निष्ठा, मित्रवान्, धनवान्, विद्या
पढ़ने पढ़ाने वाला, सर्वत्र विख्यात ( मान० ) । पुरोहिताई में निपुण राजा का मन्त्री,
मित्रता से धन को प्राप्त, परोपकारक, चतुर ( जा० भ० ) ।
सूर्य शुक्र--सद् बुद्धि, संगीत बाजे आयुध कर्म में निपुण, नेत्र शक्ति से हीन,
मित्र समाज प्राप्त रहे ( शंभु० ) रंग, मल्लादि और आयुध ( हथियार ) से धन पावे
( वृ० जा० ), णस्त्र से प्रहार करने वाला, जेल में बन्धन पाने वाला, नाट्यशाला की
हास्य भरी बातों को जानने वाला, कमजोर नेत्र, परस्त्रियों से संगम में द्रव्य प्राप्ति,
परस्त्रियो में फँसा (मान०), नट बनकर या शस्त्र का प्रयोग करके द्रव्यकमाये (फळू०)
गाना-बजाना और शास्त्र विद्या में सुन्दर बुद्धि, नेत्रों के बल से रहित, स्त्रीयुवत,
“मित्र समाज में पूर्ण ( जा० भ० ) 1
सूर्यं शनि--धमे में प्रीति, पुण्यबुद्धि, गुणज्ञ, स्त्री पुत्रों से सुखी सम्पन्त, अत्यन्त
घातु क्रियाओं से युक्त रहे ( शंभु० ) तांबा आदि धातु के काम में निपुण, अनेक बर्तन