भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 34, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 34

२६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

भांडे आदि का वनाने वाला व इनके काम से द्रव्य पावे ( वु० जा० ), विद्वान हो तब

भी क्रिया में निष्ठ रहने वाळा, धातु का जानने वाला, वृद्ध पुरुषों की तरह बर्ताव

करने वाला, स्त्री तथा पुत्र से रहित ( मान० ), धातु क्रिया व व्यवहार में वृद्धि रखने

वाला, गुण का जानने वाला, धर्म प्रिय पुत्र और स्त्री से सौख्य पाने वाला, सदा

अत्यन्त समृद्धियों सहित { जा० भ० ) ।

(२) चन्द्र मंगल--पुण्य कम से जीविका, कुटिल स्वभाव, प्रतापवान्‌ अपने आचार

से हीन, कलह में तत्पर, रोग से पीडित, माता का शत्रु ( शंभु० ), कूर कमं, स्त्री व

मद्य के घड़े वेचने वाला, अपनी माता को क्रूर ( वृ० जा० ), रक्त की पीड़ा से

व्याकुल, मृतिका, धांतु तथा चमड़े को कारीगरी जानने वाला, धनवान्‌, रण में शूर,

( मान० ), आचार रद्दित, चुगल, प्रतापी, व्यापार से आजीविका, कलह प्रिय,

मातुवैरी, रोग से दुःखी ( जा० भ० ) ।

चन्द्र बुध-सुन्दर रूप, उत्तम कमं, धन से युक्त, स्त्री में परम आसक्त, अति

बोलने वाळा, उत्तम वाणी के विजास वाला, कृपा से गीला मन और छोटा शरीर

( शंभु० ), प्यारी वाणी, अथं जानने वाला, सौख्य युक्त,सबका प्यारा, कीर्तिवान

( वृ० जा० ), स्त्री में अति आसक्त, रूप में सुन्दर, कविता करने में चतुर, धनवान्‌

गुणवान्‌, सदा हसमुख, बड़ा विद्वान्‌ अपने कुल में धर्मात्मा ( मान० ), श्रेष्ठ वाणी,

श्रेष्ठ रूप, दयालु, नम्र, स्त्री का अधिक प्रेमी, बड़ा वक्ता ( जा० भ० ) ।

चन्द्र गुरुसबंदा गूढ़ होवे गूढ़ बुद्धि, अति मित्रों वाला, परोपकारी, धर्म कर्मे

आदि से युक्त ( शंभू ), शत्रु जीतने वाला, कुल में श्रेष्ठ, चपल, धनी ( वृ० जा० );

देव गुरु पूजक, वन्धुजनों का मान करने वाला, धनवान्‌, दृढ़ प्रीत करने वाला, बड़ा

सुशील, ( मान० ) नम्रता युक्त, मजबूत, छिपी सलाह करने वाला, अपने धर्म और

कर्म में तत्पर, परोपकार में चित्त ( जा० भ० ) ।

चन्द्र शुक्ल--उत्तम गन्ध पुष्प, उतम वस्तु में मन, वस्नादि व्यापार में चतुर,

व्यसन वाळा, विधि जानने वाला ( शंभु ), वस्त्र कमं, तंतुवाय-सूत्र विनना, रफूगिरी

व वस्त्ररंगना, सीना और वस्त्र के व्यापार में चतुर ( बू० जा० ), चीजों के क्रय विक्रय

में चतुर, शूद्र वृत्ति वाला, कलहकारी, अल्प वस्त्र आदि से युक्त (मान० ), वस्त आदि

के क्रय विक्रय में चतुर व्यसन रहित, विधि का जानने वाळा, सुगन्ध और उत्तम पुष्प

उत्तम वस्त्रों में चित्त ( जा० भ० ) ।

चन्द्र शनि--पर स्त्री में तत्पर, वैश्य वृत्ति से जीविका, सदाचार से हीन, पराया

पुत्र और पुरुषार्थं से हीन (शंभु०), उसकी माता पुनभू' ( एक जगह व्याही हुई दूसरी

जगह पुत्र उत्पन्न किया ) हो ( वृ० जा० ), हाथी घोड़ें का पालन करने वाला, अल्प

पुत्र वाला, वृद्धा स्त्री के संग, वेश्या से धन प्राप्त करे, खोटा स्वभाव ( मान० ), अनेक

स्त्रियों के सेवत करने की इच्छा, वैश्य वृत्ति, साधु शील से रहित, पर पुत्र ओर पुरुषार्थ

हीन ( जा० भ० ) ।