भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अनेक ग्रहों के एक राशि में होने का फल : २७.

(३) मंगल बुध--मल्ल युद्ध में चतुर, बहुत पुत्रों की अभिलाषा, अनेक प्रकार की

औषधि वाला, पुण्य स्वमाव, हीन कमं, लोह कमं विधि जानने वाला (शंभु०), अत्तार

जड़ी वक्कल, फूल पत्ते गोंद तेल.और बनावटी वस्तु का व्यापार करे, कुश्ती लड़ने

वाला ( वृ० जा० ), निधन, विधवा पति, दुर्भाग्य स्त्री वाला, कण वृत्ति करने वाला,

सोने या लोहे की जीविका करने वाला ( मान० ), मल्ल विद्या में चतुर बहुत स्त्रियों

की लालसा, अनेक ओषधियों का व्यापार, सोना ओर लोहे की विधि में बुद्धि वाला

( जा० भ० )

मंगल गुरु--मन्त्र विद्या, अस्त्र शस्त्र के बोध में अत्यन्त निपुण तथा विवेकी, सेना-

पति राज्य, नगर या ग्राम का स्वामी, ग्रह बल के अनुसार होवे ( शंभु० ), नगर का

स्वामी, राजा या ब्राह्मण, धनवान्‌ ( वृ० जा० ), बुद्धिमान्‌ शिल्प शास्त्र को जानने

वाला, सुनने मात्र से वात का स्मरण रखे, वाक्य चतुर, घोड़ों से प्यार करने वाळा,

सबों में प्रधान ( मान० ), मन्त्र और विद्या की कला में चतुर शीलवाला, सेना का

स्वामी राजा या नगर व ग्राम का स्वामी ( जा० भ०) ।

मंगल शुक्ग--प्रपञ्च, झूठ धूतं में प्रीत, अनेक स्त्रियों के भोग में मन, घमण्डी,

सवके साथ वैर ( शंभु० ), मल्ल, गोपालक, चतुर, परस्त्रियों में आसक्त , जुआडी, ठग,

( वृ० जा० ) गुणों द्वारा पुरुषों में प्रधान, ज्योतिषी, जुभा खेलने, झूठ बोलने में निरत,

बड़ा शठ, परस्त्रियों में आसक्त, सबों में मान्य ( मान० ) स्त्रियों के भोग विधान में

चित्त, जुआ व झूठ में प्रीत, प्रपञ्च में तत्पर अभिमान रहित, सबसे बैर (जा० भ०) ।

मंगल शनि--अस्त्र शस्त्र जानने वाला, युद्ध कमं में तत्पर, सुखहीन, और लोक में

अति निन्द्य होवे ( शंभु ), दुःख कारक, झूठ बोलने वाला, निदित काम करने वाला,

( वृ० जा० ), प्रशस्त वाणी, इन्द्रजाल में निपुण, अपना धर्म छोड़ कर अन्य धर्म को

मानने वाला, कलह प्रिय, विश्वासघाती, विष तथा मदिरा के झगड़' में रहने वाला

( मान० ), अस्त्र और शस्त्र का जानने वाला, युद्ध करने वाला, चोरी झूठ में प्रीत,

सदा सौख्य रहित ( जा० भ० ) ।

(४) बुध गुरु--संगीत जानने वाला, नीति का स्वामी, नम्र, अधिक सुखी, उत्तम

गुण, धीर सुगंधित वस्तु प्रिय, उदार ( शंभु० ), मल्ल गीत प्रिय, नृत्य का ज्ञाता,

( वू० जा० ), नाचने गाने में कुशल, घंयवान्‌, पंडित, सदा सुखी ( मान० ),

गान विद्या का ज्ञाता, नम्र, सौख्य युक्त, अति श्रेष्ठ धैयेवान, निरंतर उदार, सुगंध

का भोग भोगने वाला ( जा० भ० )।

बुध शुक्र--उत्तम वाणी का विकास, गुणवान्‌ विवेकी, सदा प्रसन्न, अपने कुल में

श्रेष्ठ, सुन्दर वेश, बहुतों का स्वामी ( शंभु ), बोलने में चतुर, भूमि और गुणों का

स्वामी (वृ० जा०), नीति शास्त्र का ज्ञाता, अनेक प्रकार की कला में कुशल, धनवान्‌,:

सुन्दर वाक्य, वेद ज्ञाता, हास्य की लालसा ( मान० ), कुल में प्रतापी, श्रेष्ठ वाणी,

सदा हषं युक्त, श्रेष्ठ वेश, नग्नता युक्त, बहुत नौकर, गुणवान्‌ चतुर ( जा० भ० )।

बुध शनि--कलह प्रिय, चंचल चित्त, कला के समूहों में चतुर, बहुतों का पालन