सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
करने वाला परम सुशील (शंभु०),दुसरे के ठगने में चतुर, गुरु आदि के वचन उल्लघन
करने वाला, ( वृ० जा० ) दुबंलांग, चलने के स्वभाव वाला, उपाय रहित, सबसे
कलह करने वाला सुन्दर वाक्य बोलने वाळा, काम करने में चतुर ( मान० ),
चंचळ स्वभाव, कलह प्रिय, कला के समूहों में चतुर, श्रेष्ठ वेश, बहुत मनुष्यों का
सालक ( जा० भ० ) । ८
(५) गुरु शुक्र- स्त्री, धन, मित्र पुत्रादि से सदा सुखी, विद्या में पंडित, श्र ष्ठों से
अत्यन्त शास्त्रार्थ करे ( शंभु० ), अच्छी विद्या जानने वाला; धन और स्त्री युक्त, बहुत
गुणों से युक्त (वृ० जा०), सुन्दर स्त्री, धनवान्, धर्म में आस्तिक, प्रमाण जानने वाला
विद्या से आजीविका ( मान० ), विद्या से पंडित, सदा पंडितों से विवाद करने वाला,
पुत्र मित्र और घन के सौख्य से युक्त ( जा० भ० ) ।
गुरु शनि-अधिक यश, ग्राम नगर का स्वामी,स्त्री के पक्ष में संदेही, मनोरथ सिद्ध,
शूरमा, धनवान् कला जानने वाला ( शंभु० ), नाई या कुम्हार, अन्नकार ( रसोई
बनाने बाला ) हो ( वृ० जा० ), जीविका से युक्त, वड़ा शूरवीर, यशस्वी, नगर
का स्वामी, नगर के जनों में या सेना के मनुष्यों में मुख्य, ( मान० ), शूरवीर, धनवान्
ग्राम और नगर का स्वामी, यश वाला कलाओं में कुशल, स्त्री के आश्रय से मनोरथ
पूर्ण करने वाला (जा भ० ) ।
(६) शुक्र शनि--उत्तम शील, लेखन विधि से उत्पन्न खेल से युक्त, पत्थर के
कामों में चतुर, चंचल बुद्धि, लकड़ी चीरने वाला, (शंभु० ) अल्प दृष्टि, स्त्री के आश्रय
से धन बढे, पुस्तक आदि लिखने में और चित्र बनाने में चतुर ( वृ० जा० ), सदा
मतवाला, पशुपाळन करने वाला, बढ़ई के काम में चतुर, खारा या खट्टा पदार्थे का
प्रेमी, कारीगरी जानने वाळा ( मान० ) शिल्प शास्त्र और लेखन विधि में चतुर,
- कौतुकी, घोर युद्ध करने वाला पत्थर के काम में चतुर ।
(७, सूर्यं चन्द्र का विशेष बिचार
सूर्य पाप ग्रहों से युक्त-पिता का नाशक ( ल० चं० )
चन्द्र पाप ग्रहों से युक्त--माता का नाशक
सूर्य या चन्द्र शुभ ग्रह युक्त--शुभ फल
सूर्य या चन्द्र शुभाशुभ ग्रह युक्त--शुभाशुभ ( मिश्रित ) फल ( फ० च० )
(८) सप्तम भाव में २ ग्रह योग का फल
सप्तम में सूयं चन्द्र-पुत्र मित्रो से हीन ओर स्त्री से युक्त होता है ।
सप्तम में सूर्य मंगळ-स्त्री से हीन और स्थिर शरीर वाला होता है ।
सप्तम में सूर्य गुरु-स्त्री से युक्त धनवान् तथा राजबैरी । ;
सप्तम में सूर्य शुक्र-निर्धन, बड़ा शरीर, स्त्री से युक्त, पवंतचारी
सप्तम में सूर्यं शनि-चाकरी करने वाला, दरिद्र, नीच कर्म ।
सप्तम में चन्द्र मंगल-मिथ्याभाषी, ईर्ष्यालु, प्रलापी ।
सप्तम में चन्द्र बुध-राजा या राज्य से मान, अच्छा पंडित ।