भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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  • नीरोगता : २९७

( ३ ) द्विस्वमाव राशि में रवि पीडित और अशुभ दृष्टि योग पड़े तो--

फुफ्फुस सम्बन्धी रोग मज्जा तंतु का विकार हो ।

ग्रह प्रभाव से विविध रोग

ज्वर गंड रोग--लग्न में षष्ठेश और अष्टमेश दोनों--सूर्य के साथ ।

गठिया या शस्त्राघात--लग्न में षष्ठेश और अष्टमेश दोनों--मंगल के साथ ।

पित्त रोग--छरन में षष्ठेश और अष्टमेश दोनों--वुध के साथ ।

रोग नाश--लग्न में षष्ठेश और अष्टमेश दोनों--गुरु के साथ ।

स्त्री द्वारा रोग--लग्न में षष्ठेश और अष्टमेश दोनों--शनि के साथ ।

वायु कोप--लग्न में षष्ठेश और अष्टमेश दोनों--शनि के साथ ।

हिंसक जीव से अपघात--लग्न में पष्ठेश और अष्टमेश दोनों--राह के साथ ।

नाभि में त्रण--लग्न में षष्ठेश और अष्टमेश दोनों--केतु के साथ ।

जलज गंड या वक़--हूग्न में षष्ठेश .और अष्टमेश दोनो--चंद्र के साथ ।

पितृ स्थान ( दशम ) आदि से भी ग्रहों की स्थिति से पिता आदि के भी इसी

प्रकार रोग विचारना ( वृ० पा० ) ।

लग्नेश भिन्न ग्रह युक्त चिह्न में होने से रोग:--

(१ ) लग्नेश सूर्य युक्त चिह्न में--ताप गंड रोग ।

(२ ) लग्नेश चंद्र युक्त चिह्न में--जल विकार से उत्पन्न गंड रोग ।

( ३ ) लग्नेश मंगल युक्त चिह्न में--हथियार का घाव जिसके पुराने पड़ने से

गांठ पड़ जाती है। -

( ४ ) लग्नेश बुघ युक्त चिह्न में“-पित्त से उत्पन्न रोग ।

(५ ) लग्नेश गुरु युक्त चिह्न में--आम के विकार से उत्पन्न रोग ।

(६ ) लग्नेश शुक्र युक्त चिह्न में--क्षय .रोग हो ।

(७ ) लग्नेश शनि युक्त चिह्न में--चोर या किसी नीच जाति से किया हुआ रोग ।

( = ) लग्नेश राहु केतु युक्त चिह्न में--चोर या किप्ती नीच जाति से किया हुओ

रोग ( जा० ल॑० ) ।

विचार यहाँ बताये अरिष्ट या दुःख का प्रमाण कम या अधिक होगा या नहीं

होगा जन्मस्थ ग्रह के भाव राशि ग्रह दृष्टि या युति के शुभाशुभ स्थिति का विचार एवं

गोचर ग्रह उनके शुभाशुभ युति दृष्टि पर अवलंबित है। शुभ योग दृष्टि से दुःख या रोग

हो अपने बल एवं स्थिति के अनुसार घटा देता है या नहीं होनेदेता । पाप योग दृष्टि

से रोग या दुःख बढ़ जाता है । गोचर में उसके शुभ या पाप योग दृष्टि से घटने बढ़ने

के समय का अनुमान होता है ।

इसी प्रकार लग्नेश षष्ठेश भिन्न-भिन्न ग्रहों से युक्त होने का फल है ।

( १) लग्नेश षष्ठेश-सूर्य युवत--ज्वर का भय ।

( २ ) लग्नेश पष्ठेश--चंद्र युकत--जल में डूबने का भय ।

. (३ ) लग्नेश षष्ठेश--मंगछ युक्त--युद्ध या स्फोटक समूह से भय ।