सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 309, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंनीरोगता : २९९.
३ कृतिका में रोग हो--९, १० या २१ दिन ।
४ रोहिणी में रोग हो--३,७,९ या १० दिन 1 ५ मृग० में रोग हो--३,५ या ९ दिन ।
६ आद्वा० में रोग हो--१० दिन या १ मास या मृत्यु ।
७ पुनवंसु में रोग हो--७ या ९ दिन या मृत्यु ।
८ पुष्य में रोग हो--७ दिन या मृत्यु ।
९ आश्लेषा में रोग हो--९, २० या ३० दिन या मृत्यु ।
१० मघा में रोग हो--२०,३० या ४५ दिन या मृत्यु ।
११ पूर्वा फा० में रोग हो--०,१५ या ३० दिन या १ वषं या मृत्यु ।
१२ उत्त० फा० में रोग हो--७, १५ या २७ दिन ।
१३ हस्त में रोग हो--७,८,९ या १५ दिन या मृत्यु ।
१४ चित्रा में रोग हो--८,११ या १५ दिन ।
१% स्वाती में रोग हो--१,२,३,४,५ या १० मास या मृत्यु ।
१६ विशाखा में रोग हो--८,१५,२० या ३० दिन ।
१७ अनुराधा में रोग हो--१० या २८ दिन ।
१८ ज्येष्ठा में रोग हो--१५,२१ या ३० दिन या मृत्यु ।
१९ मूल में रोग हो--९,१५ या २० दिन।
२० प्० षा० में रोग हो--१५,२० दिन या २,३,६ मास या मृत्यु ।
२१ ३० षा० में रोग हो--२० रात्रि, १ या १॥ मास ।
२२ श्रवण में रोग हो--१०,११,२५ या ६ दिन ।
२३ धनिष्ठा में रोग हो--१३ रात्रि या १० रात्रि, पक्ष या मास ।
२४ शत० में रोग हो--१० या १२ दिन।
२५ पूर्व भा० में रोग हो--१० रात्रि, २ या ३ मास या मृत्यु ।
२६ उ० भाद्र में रोग हो--७ या १० दिन १॥ मास या पक्ष।
२७ रेवती में रोग हो--१० या २८ दिन ।
ये नीचे बताये योग हों तो रोग बढ़ेगा ।
वार नक्षत्र दिन नक्षत्र तिथि
इतवार अनुराधा भरणी इतवार मघा १२
सोमवार आर्द्रा, उ० षा० सोम० विशाखा ११
मंगल० मघा, शत० मंगल आर्द्रा ण
बुध अश्विनी, विशाखा | बुध उ० षाढ़ा० ३
गुरु मृग०, ज्येष्ठा गुरु शत्त० ६
शुक्र आएशलेषा, श्रवण शुक्र अश्विनी ८
शनिवार हस्त, पूवं भाद्र । शनिवार पू पाढ़ा ९
इस प्रकार वार नक्षत्र और तिथि का योग हो । या यहाँ बताये दिन को उक्त
नक्षत्र पड़े ऐसे योग में रोग उत्पन्न हो तो अच्छे लक्षण नहीं हैं रोग अवश्य बढ़ेगा ।