सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 310, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें“३०० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
जन्म नक्षत्र, जन्म राशि ओर अष्टम चन्द्र इन योगों में रोग उत्पन्न हो तो अपमृत्यु या मृत्यु हो । जन्म कुण्डली में पाप ग्रह कब मृत्यु सूचित करते हैं ओर बीमारी कोन प्रकार की होगी इन बातों को समझ लेना चाहिए । जन्म के पाप ग्रह आयु का या रोग का या शरीर विकार का बोध करते हैं। अत्येक वर्ष इस स्थिति से जान लेना चाहिए कि कौन बीमारी कव होगी और कब अच्छी होगी । जन्म काल निग्रह से जान लेना चाहिए कया विकार करेंगे । इसके विषय में पहिले बता चुके हैं ।
ज्वर--१--लग्नेश और षष्ठेश सूर्य युक्त हो तो ज्वर का भय हो (स० चि०) । २--षष्ठ या अष्टम में सूर्य हो ( फल० ) । ३--अष्टम में चंद्रमा राहु या केतु युक्त हो तो चौथिया ज्वर हो । ४--अष्टमेश चंद्र या राहु या केतु युक्त हो तो चौथिया ज्वर हो । ४--यदि कूर षष्ठ्यंश में उपरोक्त ग्रह हों तो भी चौथिया ज्वर हो (स० चि०) । ६--जन्म में मंगल और अष्टम में सूर्य हो तो दाह या ज्वर हो । ७--जन्म में लग्न या चंद्र के पास सूर्य या मंगल १-५-९ राशि या अग्नि राशि में हो तो उसकी प्रकृति उष्ण रहें सदा ज्वर की बाघा रहे । ८--तुला राशि का सूर्य की दशा में या क्षीण चंद्र की दशा में, या केन्द्र की दशा में बुध की अन्तर्दशा हो। या शनि की दशा में बुध की अंतदेशा हो तो भयंकर ज्वर हो ।
न में मंगळ और षष्ठेश अष्टम में होतो ६या १ २ वषं में ज्वर हो पू० पा० )।
सन्निपात शीतदोष--१--द्वितीय भाव में चंद्र हो तो शीत सम्बन्धी रोग और सम्निपात हो ( शंभु० ) ।
२--दुसरे में राहु चंद्र से युत हो तो निश्चय शीत दोष तथा सन्निपात हो (शंभु.) । ब्रिदोष--१--मुरु बुध शुक्र अष्टम में हो तो २१ वर्ष में त्रिदोष हो (स्वा० सं०)। बहुत पसीना--१--चन्द्रमा द्वितीय या अष्टम हो तो बहुत पसीने वाला हो ( जा० पारि० ) 1 डुगंध देह--दशम में मंगल बुध से युक्त हो तो दुगंध देह हो ( जा० पारि० )। दाह--तनुभाव में मंगल और चतुर्थ में सूयं हो तो दाह रोग हो । उष्णता से पीड़ा--यदि पाप युक्त मंगळ द्वितीयेश के साथ हो तो अति उष्णता से पीडित हो ( स० चि० )1 पित्त विकार--१--१ और ६ के स्वामी बुध युक्त हों तो पित्त रोग हो ( स० चि० ) || ु
२--पष्ठ स्थान में बुध हो तो पित्त विकार हो ( ज्यो० शा० )1 ३--सुर्य षळ स्थान में पाप दृष्ट हो ( जा० पारि० )1