भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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नीरोगता : ३२१

३-हितीय भाव में राहु हो तो दांत रोग हो ( जा० सं० ) ।

४-राहु या केतु द्वितीय भाव में हो तो बड़े दांतवाला हो या दंत रोगी हो(शंभु.) ।

५-चन्द्रमा पाप ग्रहों की राशि में हो सूर्य मंगल की दृष्टि हो तो दाँतों को हरने

वाला हो ( जा० सं० ) ।

६-पाप ग्रह सप्तम भाव में हो शुभ दृष्टि न हो तो बुरे दाँत वाला या ओठों में

घाव हो ( जा० सं० )1 ८

७-राहु या केतु षष्ठ भाव में हो तो दाँतों में य' ओठों में रोग हो (प्रा० यो०) ।

८-१, २ या ९ लग्न में जन्म हो उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो दाँत का

विकार हो ( जा० पारि० )।

९-द्वितीयेश राहु युक्त दुष्ट स्थान में हो या राहु से युवत जो स्थान है उसके

स्वामी से युक्त हो तो उनकी दशा अंतदंशा में दंत रोग हो । बुध की अंतदंशा में जीभ

रोग हो ( जा० पारि० ) ।

१०-सूयं शनि द्वितीय भाव में हो तो श्रवण शक्ति व दाँतों का हरण हो

( जा० सं० ) ।

११-लगन में सिंह का चन्द्र हो पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो दाँत रोग शोथ रोग या

मस्तक रोग हो ।

१२-शनि, सूर्य, चत्र सप्तम हो शुभ ग्रह युत या दृष्ट न हो तो दंत नाश हो ( जा० भ० )।

१३-लग्न से सप्तम में सूर्य, चन्द्र, मङ्गल या शनि हो उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि न हो ती दंत रोग हो ( प्रा० यो० ) ।

१४-पंचम शनि, लाभ में सूर्य, तृतीय घर में चन्द्र हो तो दंत रोग हो (प्रा.यो.) ।

१५-पाप ग्रह मेष वृष राशि का लग्न में पाप दृष्ट हो तो दंत विकृत हों (शंभु) ।

१६-कर्क, कुम्भ, वृश्चिकांश का चंद्रमा राहु केतु युक्त चतुर्थ में हो ओर पाप

युक्त हो तो दाँत और कंठ रोग हो ( स० चिं० )।

दंत और मुख रोग का विचार अन्य प्रकार से

उप पद से, सप्तमेश से द्वितीय में राहु हो--बड़े दाँत वाला हो ।

उप पद से, सप्तमेश से द्वितीय में केतु हो--अस्फुट वक्ता ( रुक कर बोले ) 1

उप पद से, सप्तमेश से द्वितीय में शनि हो--कुरूप ।

उप पद से सप्तमेश जो हो उससे द्वितीय में राहु हो--मूक ।

उप पद से सप्तमेश जो हो उससे द्वितीय में पापग्रह हो--बिना दाँत, अधिक या

बड़े दाँत वाला ।

उप पद से सप्तमेश जो हो उससे द्वितीय में केतु हो-वात व्याधि,अस्फुट वक्ता ।

उप पद से सप्तमेश जो हो उससे द्वितीय में अन्य ग्रह हो-मिला हुआ फल

(जमिनि०) ।

दाँत सहित जन्म--शनि और मंगल किसी भी राशि में बुध के नवांश में हो तो

बालक दाँत सहित जन्मे ( जा० पारि० ) |

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