सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 332, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३२२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
वाणी विचार ( शुभ वाणी ) १--घन भाव वाणी का भी बोधक है हितीयेश शुभ ग्रह होकर उच्च का या मित्र स्थानी या केन्द्र में हो या शुभ घर में हो तो मिष्ट वाणी युक्त वह कुटुम्बियो की सहायता करेगा ।
२--दितीयेश शुभ ग्रह युक्त हो या दृष्ट हो, द्वितीय भाव में शुभ ग्रह हो तो मधुर वाणी हो ( स० चि० )।
३--द्वादशेश लग्न में हे! तो मधुर भाषी हो ( जा० ल॑० )। ४--हितीय भाव में बलवान् गुरु या बुध हो तो अच्छा बोलने वाला और अच्छा मुख हो ( जा० सं० ) |
#--द्वितीय भाव शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट हो तो सुन्दर वाणी हो और धन सुख हो ( जा० सं० )।
६--छग्न व द्वितीय भाव में गुरु हो तो मीठे वचन बोलने वाला प्यारी व सत्य वाणी बोलने वाला हो ( शंभु० ) । > : ७ लग्न या द्वितीय में बुध हो तो भी वही फल हो ( शंभु० ) 1 ८--द्वितीयेश स्वक्षेत्री, मूल त्रिकोण, मित्रगृही, स्वक्षेत्री होया शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो वाचाल और उपाख्यान कर्ता हो ( ज्या० शा० ) । 5--धन भाव में शुभ ग्रह का वर्ग हो तो वाक्य सिद्धि हो ( जा० पारि० )। १०-द्वितीयेश शुभ ग्रह युक्त त्रिकोण में या केन्द्र में या शुभ स्थान में हो तो वाचाळ हो ( जा० पारि० )। ११-द्वितीयेश जिसके नवांश में हो उसका स्वामी शुभ हो अपने उच्च में हो या शुभ ग्रह॒ से दुष्ट हो या पारावतांश में हो तो वाचाल ओर चतुर हो (जा० पारि०) । १२-शनि मकर राशि में हो तो वह थोड़े प्रयोजन के लिए बहुत बोलने वाला हो ( जा० लं० ) ।
१३-मंगल बुध या चन्द्र ये बली ग्रह से दृष्ट हों तो शीघ्र बोलने वाला या शीघ्र जवाब देने वाला हो ( जा० ल॑० ) । १४-राहु केतु धीर ग्रह हैं इनके साथ द्वितीयेश हो तो सभा में पराजय न हो । वाणी विचार १५-द्वितीयेश केन्द्र में पारावतांशक और परमोच्चांशक हो। गुरु या शुक्र सिंहासनांश हो व वर्गोत्तम में हो बुध से युक्त हो तो वाचाल ( बहुत बोलने वाला ) हो।
१६-द्वितीयेश गुर युक्त हो या पारावतांश में हो उसका स्वामी शुक्र या बुध से युक्त हो या पारावतांश में हो तथा द्वितीयेश उच्च या मित्र राशि में हो तो वाचाल हो ( स० चि० )।
१७-धनेश पर काई पाप ग्रह का प्रभाव न हो या बुरे घर में न हो केवळ शुभ ग्रह देखते दों तो आम सभा में बड़ी ढिठाई से वोलेगा । वाणी दोष १- चन्द्र शनि युक्त हो और मंगल की दृष्टि हो तो कठोर वचन बोलने वाला हो ( वृ० जा० )1