भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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नीरोगता : ३२३

च्या धनेश द्वादश या छठे भाव में हो जब चन्द्रमा शनि का योग हो ।

३--द्वितीयेश यदि नीच का हो ३, ६, ७, १२ स्थान में चन्द्र या गुरु किसी एक

से युक्त हो तो वाणी विफल हो ( ज्यो० शा० )।

४--धन भाव में चंद्र और शनि हो तो हकला के बोले ( ज्यो० शा० )।

५--बुध यदि धन स्थान में निर्वेल तथा पाप दृष्ट हो तो हकलाकर बोले

(स० चि० ) ।

६-- हितोयेश शक्ति हीन शुभ ग्रह हो जिस पर पाप दृष्टि हो तो वह बोलने में

हकलावे । त

७--हितीयेश निर्बल होकर कूर अश में हो और द्वितीय में क्रूर ग्रह होवे द्वितीयेश

पर कोई शुभ दृष्टि न हो पाप दृष्टि हो तो हकला कर बोले ।

_ पर--धन भाव में पाप युक्त शुक्र दुसरे द्रेष्काण में हो तो गूंगा हो । यदि तीसरे

द्रेष्काण में हो तो हकलावे ( शंभु० ) ।

९- शनि युक्त चंद्र पाप गृही हो और सूर्य मंगळ से दृष्ट हो तो वाणी को हरने

वाला है ( जा० सं० )।

गंगा १--बुध ४,८,१२ राशियों में कहीं हो, सूर्य चौथे भाव में हो चन्द्रमा से

दृष्ट हो । षष्देश पाप ग्रह से दृष्ट हो तो वह गूंगे स्वर वाळा हो ( शंभु० ) ।

२--शुक्ल पक्ष का चन्द्रमा लग्न में मंगल युक्त हो तो गूँगा हो।

३--बुध ९ या १२ राशि का शनि से पूर्ण दृष्ट हो तो गद्गद्‌ वाणी वाला हो ।

( शंभु० ) ।

४--चतुर्थ भाव में चर राशि हो और उ&का स्वामी और मंगल ६,१२ भाव में

हो तो गूँगा हो ( वृ० पा० ) ।

५--द्वितीयेश गुरु से युक्त अष्टम में हो तो गूँगा हो यदि स्वस्थानी यो उच्च का

हो तो दोष नहीं करता ( जा० पारि० ) ।

६-यदि षष्ठेश बुध हो तो जिह्वा नष्ट हो ( शंभु० ) ।

७--चन्द्रमा वृष राशि में हो पाप ग्रह सव ऋक्ष सन्धि में हों तो गूंगा हो

( जा० पारि० ) ।

( ऋक्ष सन्धि-कर्क, वृश्चिक, मीन के अन्त में)

८--पंचमेश या गुरु मित्र में हो तो गूंगा हो ( जा० ल॑० )।

इसी प्रकार त्रिक आदि जनों का उनके भाव में गूँगा होने का योग आदि का

विचार करना जैसे--

दशमेश, गुरु या पंचमेश युक्त त्रिक में हो तो- पिता गूंगा 1

तृतीयेश गुरु या पंचमेश यक्त निक में हो तो--भाई गूंगा ।

चतुर्थेश, गुर या पंचमेश युक्त निक में हो तो- माता गूंगी ।

सप्तमेश, गुरु या पंचमेश युक्त त्रिक में हो तो--स्त्री गूंगी ।

इसी प्रकार और भी लोगों का विचार करना । इसी प्रकार प्रत्येक योग से भी

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