सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 339, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंनीरोगता : ३२९
१५--पाप ग्रह ६,८ भाव में हो तो अंधा हो । छठे भाव में पाप ग्रह बाई आँख
और आठवें में हो तो दाहिनी आँख से अंधा हो (जा० पारि०)।
१६--मंगल द्वितीयेश होकर सूर्य, चन्द्रमा से ८ वें भाव में हो और शनि इया १२
वें भाव में हो तो अधा हो (जा० पारि०) ।
१७--चन्द्र ६,5१२ भाव में हो ।
१८--चन्द्रमा छठे, सूर्यं आठवें, शनि वारहवें, मंगल दूसरे भाव में हो तो निश्चय
अंधा हो (जा० पारि०)। *
१९--लग्नेश युक्त द्वितीयेश ६,८,१२ भाव में हो
२०--१,२,७,९ और ५ के स्वामी ६,५,१२ भाव में हों और शुक्र लर्न से संबंध
रखता हो तो नेत्रहीन हो (जा० पारि०) :
२१-१,२,६,८,१२ भाव में चन्द्र मंगल शनि हो तो शरीर में वात रोग हो
और अंधा हो ( जा० भ०) ।
२२-लग्न में गुरु सप्तम शनि हो तो वात से पीड़ित हो अंत में अन्धा हो
(जा० भ० | 1
२३-द्वितीय भाव में या द्वितीयेश पाप ग्रह दृष्ट युक्त हो तो नेत्र नष्ट होंगे
( स० चि० ) 1
ग्रहों के योग प्रभाव से भिन्न-भिन्न प्रकार से ग्रहों के गुण धर्म के अनुसार रोगादि
से नेत्र नष्ट हों । जैसे मान लो दूसरे भाव में मंगल पाप युक्त या दृष्ट है तो अग्नि,
पित्त गर्मी या अचानक घटना से या अस्त्र-शस्त्र द्वारा पीड़ित होकर नेत्र नष्ट हों यदि
शनि हो तो बात रोग से पीड़ित होकर नेत्र नष्ट हो इत्यादि प्रकार से विचार लेना ।
२३-धनेश या व्ययेय या शुक्र व. लग्नेश से युक्त होकर त्रिक में हो तो अंधा हो
( जा० रू० ) ।
२४-द्वितीय भाव में शुक्र युक्त चन्द्र हो तो अंधा हो ( जा० ल॑० ) ।
२५--सूर्य या चन्द्र मिल कर ककं या सिंह में हो ओर मंगल और शनि की
दृष्टि हो तो दृष्टि नाश हो ( स० चि० )।
यदि शुभ अशुभ दोनों ग्रह की दृष्टि हो तो दूषित नेत्र हों । यदि केवल शुभ युक्त
या दृष्ट हो तो कोई हानि नहीं होगी । परन्तु बाद में नेत्रों को हानि पहुंचेगी (स.चि.)
२६--व्ययेश पाप युक्त अशुभ षष्ठांश गत पाप ग्रह से सम्बन्धी हो तो नेत्र
नाश हो ( स० चि० ) ।
२७--लग्न से पञ्चम के पद में स्थित राहु पर गुरु की दृष्टि हो तो नेत्र नाश
हो ( जैमिनि ) ।
२८--लग्न में क्रुर राशि और लग्नेश क्रूर ग्रह की राशि में हो ( जा० लं० )1
२९--सू्ये चन्द्र दोनों करग्रह के मध्य में हों जसे लग्न में सूर्य या चन्द्र हो व्यय
में मंगल, द्वितीय भाव में शनि हो ये अंशों में समीप हों जैसे सूर्य चन्द्र यदि १०-१२