भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 369, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 369

राजयोग : ३५९

८९-गुरु नीच नवांश में न हो, बळी शनि उत्तभ वर्ग में हो, सूर्यं शुभ ग्रह से दृष्ट हो या शुभ ग्रह के नवांश में हो तो राजा का प्रिय या राजा के समान हो (जा० पारि०) ।

९०-कर्क का गुरु लग्न में हो मेष का मंगळ हो तो बलवान्‌ राजा हो या कले-

क्टर इंजीनियर आदि हो (वृ० जा०)।

९१-ककं का गुरु चन्द्र केन्द्र में हो तो वह काश्मीर का राजा हो (जा० भ०) ।

९२--कर्क का गुरु लग्न में हो तो वह मकान बावली नगर आदि बनाने वाळा

होता है (जा० म०) ।

९३--कर्क लग्न में गुरु और चन्द्र हो शुक्र बली होकर केन्द्र में हो शेष सब ग्रहः ११,३,६ भाव में हों तो धनवान्‌ दीर्घायु चक्रवर्ती राजा हो (मान०) ।

९४--कर्क लग्न में गुरु हो या मेष का मंगल हों तो इन दोनों योगों में शत्रुओं

को जीतने वाला राजनीति शास्त्र में निपुण राजा हो (जा० भ०) ।

९५--कर्क का गुरु लग्न में हो, सप्तम शुक्र, चतुर्थ शनि, दशम मंगल हो तो

राजा हो (जा० भ०) । १

९६--ककं का गुरु हो, तुला में शनि चन्द्र, मेष का सूर्य लग्न में हो तो बड़ा

राजा हो (शभु०) ।

९७--कर्क का चन्द्र गुरु हो शुक्र मीन लग्न में, सूर्य मंगल मेष में हो तो इन्द्र

समान राजा हो (जा० म०) ।

९८--कक लग्न में गुरु, लाभ में वृष का चन्द्र शुक्र बुध तीनों हों, मेष का सूर्य

दशम हो तो पराक्रमी राजा हो (वृ० जा०) ।

९९---कर्क का गुरु लग्न में, लाभ में बुध, शुक्र मेष का दशम हो (मान०) ।

१००--कर्क का गुरु, मीन या मिथुन में चन्द्र, कुंभ में शुक्र । अन्यमत कर्के का

गुरु मीन का चन्द्र, कुम्भ में शुक्र हो तो हाथियों से युक्त राजा हो (शंभु०) ।

१०१--कर्क में गुरु, मेष या मीन में चन्द्र, कुम्भ में शुक्र हो तो वाहन युक्त

समृद्ध भोगी राजा हो (जा० भ०) ।

१०२--कर्के में गुर चन्द्र हों, उच्च में जाने वाला सूर्य त्रिकोण में हो तो रत्नों

से परिपूर्ण भूमि का राजा हो (जा० पारि०)।

१०३--ककं में गुरु चन्द्र या मेष में सूर्य मंगळ, या वृष में चन्द्र शुक्र या मकर

में शनि मंगल या कन्या में राहु बुध, या तुला में शनि शुक्र हो, या मीन में गुरु

शुक्र या.मिथुन में राहु बुध हों इन योगों में राजा या घनी हो (जैमिनि) ।

१०४--कक॑ का गुरु हो, मीन का सूर्य त्रिकोण में हो, या मेष का चन्द्र त्रिक

में हो तो पृथ्वी को रक्त से परिपूर्ण करे अर्थात्‌ बड़ा योद्धा हो (मान०) सूर्य या चन 5

यहाँ उच्चाभिलाषी अर्थात्‌ उच्च की ओर जाने वाला हो यहाँ मीन का सूयं या मेक

या चन्द्र उच्चाभिलाषी है ।