भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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३६० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

अन्य - केन्द्र में गुरु, मीन का सूर्य लग्न से त्रिकोश में हो या चन्द्रमा लग्न में हो

तो रक्त पूर्ण पृथ्वी का पालक हो (मान०) ।

१०५-केद्धमे गुरु हो तो अनेक कुयोगों को दूर करता है (मान०) केन्द्रमै गुरु भी

न हो, लग्न में शुक्र बुध न हो,दशम में मंगळ भी न हो तो जातक कुछ न कर सकेगा ।

अकेला गुरु केन्द्र या त्रिकोण में हो या लग्न में या लाभ में हो तो सब कार्य करने

में समर्थ हो और दीघं जीवो हो (मान०) ।

१०६--कोई बलो शुभ ग्रह केन्द्र में हो शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो सव दुःख दूर कर

सकेगा (छ० च०) ।

१०७--चंद्र सहित गुरु केन्द्र में हो, शुक्र से दृष्ट हो और कोई ग्रह नीच का न

हो तो यशस्वो राजा हो (शंभु०) ।

१८-बली होकर गुरु शुक्र या लग्नेश केन्द्र में होकर दीर्घायु और राजवल्लभ

होता है (मान०) । :

१०९-- गुरु बुध शुक्र इनमें से एक भी ग्रह केन्द्र में हो तो दीर्घायु गुणवान्‌ और

राजप्रिय हो (जैमिनि) ।

११०--बली गुर केन्द्र में हो तो सुवर्ण वस्त्र सम्पत्ति युक्त सुखी सत्कर्मी हो

जा० सं०) ।

११२--चारों केन्द्र में गुरु बुध शुक्र और शनि से युक्त राहु हो तो लक्ष्मी आरोग्य,

पुत्र, मान, आदि प्राप्त हों (मान०) ।

( Co बुध) शुक्र, शनि चारों ग्रह सहित राहु हो तो उपरोक्त फल

ल० च०) ।

११३--तीनों केन्द्रों में शुक्र बुध गुरु हो ओर दशम में मंगल हो तो कुछ दीपक

हो (मान०) ।

केन्द्र में गुरु लग्न में बुध या शुक्र, दशम मंगल हो तो कुल दीपक हो ।

११४--ग्रुरु केन्द्र त्रिकोण या उच्च में, चन्द्र बुध, शुक्र से युक्त या दृष्ट हो तो

सार्व भौम राजा हो (मान० ) ।

११५--गुरु बुध शुक्र केन्द्र और त्रिकोण में हो तो वह धर्म अर्थ विद्या कीर्ति युक्त शांत सुशील राजा हो (जा० सं०) 1

११६--गुरु शुक्र या नवमेश केन्द्र कोण या लाभ में हों तो अनेक वाहन युक्‍त

संडळ का राजा हो (जा० पारि०) ।

११७--गुरु शुक्र या चतुर्थेश केन्द्र या लाभ में हो तो वाहनों का स्वामी और

राजा हो (छ० चं०) । ११८--गुरु शुक्र बुध केन्द्र त्रिकोण में हो ३, ६, ११ भाव में बुध शनि हो, सप्तम में पूर्ण बली चन्द्र हो तो राजा के समान हो ( मान० ) ( जा० सं० ) |

र १ | ९ गुरु सूर्य बुघ शनि त्रिकोण में मंगल दशम में हो तो राजयोग होता है

मान०) ।