भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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'राजयोग : ३६१

१२०--त्रिकोण में गुरु सूर्य, लर्न में शनि चंद्र, दशम मंगल हो तो राज योग होता है (छ० चं०) । १२१-गुरु स्वक्षेत्री हो तो बन में भी मित्र मिले (जैमिनि) ।

१२२-गुरु बुध शनि तीनों स्वक्षेत्री हों तो दीर्घायु हो अपने-अपने पद में धन

सम्पादन करने वाला हो ( छ० चं० ) ।

१२३-गुरु शुक्र मंगल वर्गोत्तम में हों और पाप ग्रह केन्द्र में हो तो राजा हो

(जा० पा०) ।

१२४-वर्गोत्तम या पुष्करांश में गुरु मंगल चंद्र साथ हों तो राजां हो (जा.पा.) ।

१२६-गुरु लाभेश हो ओर चंद्र से केन्द्र में धनेश नवमेश लाभेश में से कोई एक

हो तो राजा हो ( जा० पा० )।

१२७-गुरु पर मंगल की दृष्टि हो और मंगल पर गुरु की दृष्टि हो तो देव

पूजित परोपकारी मंत्री हो ( जैमिनि ) ।

१२८-बुध गुरु युक्त या दुष्ट हो तो उसकी आज्ञा राजा लोग माने (स०चि० )॥

गुर विद्या का कारक है.और वुध ज्ञान का कारक है । दोनों का योग प्रभावशाली

होता है परन्तु भिन्त-भिन्न राशियों में भिन्न-भिन्न फल देगा जैसे मकर में जहाँ गुरु

नीच का है या मौन में जहाँ बुध नीच का है या करं का गुरु जो उच्च का हैया `

कन्या का बुध जो उच्च का है।

१२९-लगन में गुरु हो, बुध कोई केन्द्र में हो दोनों पर नवमेश और लाभेश की

दृष्टि हो तो राजा के समान हो ( स० चि० )।

१३०-लन में गुरु, केन्द्र में वुध हो नवमेश से दृष्ट हो तो राजा के बराबर

धनी हो ( जा० पा० ) ।

१३१-छरन में गुरु, दशम या पंचम में चन्द्र हो तो राजमान्य, महा वुद्धिमान्‌,

और तेजस्वी हो (मान०) ।

१३२-लग्न या पंचम में गुर हो, द्वादश में चन्द हो तो राजमान्य विशाळ बुढि,

तेजस्वी, जितेन्द्रिय हो (जा० सं०) ।

१३३-लग्न या पञ्चम में गुरु हो दशम में चन्द्र हो तो इन्द्रियजित्‌ बुद्धिमान्‌

राजा हो (जा० सं०) |

१३४-मकर राशि छोड़कर और कोई राशि में लग्न में गुरु हो तो मतवाले

हाथी युक्त राजा हो (जा० भ०) ।

१३४-गुर, बुध, या शुक्र चन्द्र के साथ लग्न में हो तो राज लक्षण से युक्त हो ।

१३६-छरन में गुरु और व्यय में शनि हो बीच में सब ग्रह हों तो कुटुम्ब ओर

चल्धुक्त राजा होता है (मान०) ।

१३७-छरन में गुरु, तीसरे चन्द्र, नवम बुध, लाभ में शुक्र, मकर का शनि हो तो

चक्रवर्ती राजा हो (जा० भ०) ।

१३८-छू्न में गुरु, ढितीय बुध मंगल, चतुर्थ में शुक्र सूयं दोनों हाँ दशम में