भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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३६२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

चन्द्र, लाभ में शनि हो तो राजपुत्र राजा हो अन्य धनी हो (जा० सं०) ।

१३९-छरन में मकर राशि छोड़कर और किसी राशि में गुरु हो और शुक्र पर

गुरु की दृष्टि हो तो राज घरों में उत्पन्न हाथियों से युक्त राजा हो (फल०) ।

१४०-छरन में गुरु बुध या शुक्र में से कोई हो शनि सप्तम हो सूर्यं दशम हो तो

भोग वाले का जन्म जानो (जा० सं०) ।

अन्यमत-गुरु, बुध शुक्र, की राशियाँ लग्न में हों सप्तम शनि दशम सूर्य हो तो

धन हीन मनुष्य को भोगवान्‌ वनाता है (वृ० जा०) ।

१४१-दूसरे भाव में गुरु शुक्र युक्त हो तो शत्रु को जीतने वाला भूप॑ति हो

(जा० पारि०) ।

१४२-द्वितीय भाव में गुरु बुध शुक्र हो सप्तम में शनि चन्द्र मंगल हो तो बड़ा राजा हो शत्रु का नाश करता हो (जा० भ०) ।

१४३-सू्यं से दूसरे भाव में गुरु बुध शुक्र हो अस्त न हो और शत्रु ग्रह की दृष्टि न हो तो उस राजा के सामने शत्रु की फोज भाग जाती है (शंभु०) ।

१४४-तीसरे भाव में गुरु, अष्टम में शुक्र हो बीच में द अन्त में और २ ग्रह हों तो निश्‍चय राजा हो । अन्यप्रत-तीसरे में गुरु अष्टम में शुक्र हो शेष ग्रह बीच में हों तो निश्चय राजा हो (जैमिनि) ।

१४५-तीसरे गुरु छाभ में चन्द्र हो तो कुछ दीपक प्रसिद्ध राजा हो (मांन०) ! ड

१४६-छरन से तृतीय भाव में गुरु हो या चन्दर सूये से पञ्चम नवम में हो तो राजा हो।

१४७-अंगल से ३,५,९ भाव में गुरु सूर्य चन्द्र हो तो अनेक सम्पदा और वाहुन युक्त राजमान्य हो (जा० भ०) ।

अन्यमत-३,५,९ भाव मे गुरु सूयं बली हों तो अनेक सम्पदा और वाहन युक्‍त राजा हो ।

अन्यमत--३,५,९ भाव में शुक्र सूये चन्द्र हो तो उपरोक्त फल (शंभु०) ।

१४८-चतुथं भाव में गुरु शुक्र बलवान्‌ हो तो राजा हो (जा० भ०) । १४९-चतुर्थ में गुर चन्द्र शुक्र, पञ्चम में मंगल शनि हो, कन्या लग्न में बुध. हो तो गुणवान्‌ राजा हो (जा० सं०)।

१५०-चतुथं में गुरु, छन्त में शनि, दशम में सूर्य चंद्र, लाभ में मंगळ बुध शुक्र हो तो राजपुत्र राजा हो अन्य धनी हो (बु जा०) । अन्यमत-शनि मकर छनन में हो (प्रा० यो०) । १५१-चतुथं में गुरु शुक्र मंगल चंद्र ये चारों सूयं चंद्र से युक्त हों तो राजा हो (मान०) ।

जतांतर-तु्थं में गुर शुक्र मंगळ चंद्र ये सुयं शनि इनसे युक्त हों (० चं०) ।