भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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राजोगय : ३६३

१५२--चतु्े में गुरु हो, लग्न में मेष का सूयं, दशम में मंगल हो तो संसार का स्वामी हो (ल. चं.) ।

1१५३--चतुर्थ में गुरु, लग्न में चन्द्र, दशम शुक्र हो और शनि अपने उच्च का या | स्वक्षेत्री हो तो राजा के तुल्य हो ( स. चि. ) ।

१५४--चतुर्थ में गुरु, लग्न में उच्च का सूर्य, दुसरे में चन्द्र, तीसरे शुक्र और राहु, बारहरवे बुध हो, लाभ या छठे घर में शनि हो तो चक्रवर्ती राजा हो (मान०) ।

१५५--चतुर्थ में उदय गुरु हो, वृष में शुक्र हो और ग्रह नीच शत्रु नवांश से

(व न प्रकाशवान्‌ कांति वाले हों तो देव तुल्य बलवान्‌ क्रोध रहित हो जा. भ. ) ।

१५६--पंचम में गुरु और दशम में चन्द्र हो तो बड़। बुद्धिमान्‌, तपस्वी, जितेन्द्रिय राजा हो ( मान.) ।

१५७--लग्न से पंचम में गुरु नवम में चन्द्र तृतीय में सूयं हो तो कुबेर समान राजा हो ( जा. सं. ) । ५

१५८--गुरु पंचम भाव में हो चन्द्र उससे केन्द्र में हो और यदि लग्न स्थिर राशि में हो और दशम हो तो राजा हो (स. चि.) ।

१५९--पंचम भाव में गुरु शुक्र हो अस्त न हो, सूर्य से रहित मकर में मंगल हो, नवम में शनि हो तो प्रतापी राजा हो ( शंभु. ) ।

१६०--लग्न से पंचम या नवम गुरु व सूर्य हो अष्टम में मंगल हो तो घनवानु राजा हो ( लू. चं. )।

१६१--छठे भाव में गुरु हो, ककं में सूर्य चन्द्र हो, बुध उच्च का हो लग्न में कोई ग्रह बली हो तो राजाधिराज हो (जा. भ. ) ।

१६:--छठे भाव में गुरु लग्न में चन्द्र हो तो विख्यात कुछ दीपक हो (मान.) ।

१६३--गुरु सप्तम हो साथ में त्रिकोणेश भी हो और लग्नेश की दृष्टि हो तो राजा के तुल्य हो ( स. चि. )।

१६४--सप्तम गुरु, लग्न में मेष का बुध, चतुर्थ चन्द्र, दशम शुक्र हो तो कीतिमान्‌ राजा हो ( शंभू. ) ।

१६५--सप्तम गुरु, लग्न में वृष का चन्द्र, चतुर्थ में सूयं, दशम में शनि हो तो बडी सेना युक्त राजा हो ( जा. भ. ) ।

१६६--सप्तम में गुरु, लग्न में कन्यो का वुध, तीसरे सूर्य मंगल, छठे शनि,

चतुर्थं शुक्र हो तो महाराजा हो उसे सब मस्तक नवावें ( शंभु ) ।

१६७--सप्तम में गुरु चन्द्र हो, लग्न में कन्या का बुध हो, पंचम शनि मंगल,

दशम शुक्र हो तो राजा हो ( वृ. जा. ) ।

१६८--सप्तम गुरु, लग्न में मंगल शनि, चतुर्थं चन्द्र, नवम शुक्र, दशभ सूर्य, लाभ में बुध हो तो राज वंशी राजा हो अन्य धनी हो ( वृ. जा. ) ।