भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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: ३६४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

१६९--सप्तम में गुरु, लर्न में बुध, चतुर्थ में पूर्ण चन्द्र कर्क का, दशम में शुक्र

हो तो पृथ्वी का राजा हो (जा. पारि. ) ।

१७०--गुरु अष्टम में हो और शनि दशम में हो तो ३० वर्षं में राज्य धन प्राप्त

करे ( जा. सं.) ।

१७१--गुरु नवम स्थान में हो तो मंत्री या राजा तुल्य हो ( शंभु ) ।

१७२--गुरु नवम म हो सूर्य से दृष्ट हो तो उपरोक्त फल ( जा. स. ) ।

१७३--बली गुरु व शुक्र नवम में हो, वली बुध ठग्न में हो अन्य कोई ग्रह चतुर्थ में हो शेष ग्रह ९,२,३,६,१०,११ भाव में से किसी में हो तो राजपुत्र धर्मात्मा राजा

हो अत्य धनी हो ( व. जा. ) ।

१७४--चेष्टाबली गुरु बुध शुक्र नवम में हो मित्र ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तो प्रतापी राजा हो ( ज॑मिनि. )। |

अन्यमत--नवम में चेष्टावली गुरु बुध शुक्र चन्द्र मित्र ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो 'तो प्रतापी राजा हो ।

अन्यमत--नवम में गुरु बुध शुक्र चन्द्र प्रकाशित किरणों वाले हों अस्त न हों, मित्र ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तो वड़ा राजा हो जनता देव तुल्य पुजे ( फल. ) । १७५-नवम में गुरु, पंचम में बुध, ककं में चन्द्र हो तो राजयोग होता है (जैमिनि) । अन्यमत-नवम में कोई शुभ ग्रह हो पंचम में बुध, ककं में चन्द्र हो तो राजयोग होता है ( मान. ) ।

१७३--नबम या चतुर्थ में गुरु शुक्र और नवमेश हो तो राजा, सेनापति या धनी हो ( जा. सं. ) ।

१७७ -दशम में गुरु शुक्र बुध चन्द्र चारों हों तो उसके सवं कार्य सिद्ध हों राज मान्य हो, राजाओं में पुज्य हो ( मान. ) ।

१७८-दशम में गुरु स्वगृही हो या बुध या शुक्र स्वगृही हो और पूर्ण चन्द्र भी हो तो कुलानुमान राजा हो ( शंभु. ) ।

१७९--दशम में गुर, घन भाव में शुक्र, छठे राहु हो तो पराक्रमी राजा हो ( मान. ) |

१५०--दशम ओर लग्न में गुरु शुक्र हो या लाभ में बुध शुक्र दोनों हों और मेष का सूर्य हो तो राजा हो (जा. सं. ) | > १८१--दशम में गुरु या शुक्र हो कन्या लग्न में बुध, सप्तम में चन्द्र पंचम में मंगल हो तो राजा हो या रानी का कामदार हो (प्रा. यो. ) । १८२--दशम या लाभ में गुरु चन्द्र शनि, लग्न में बुध, तृतीय मंगल, चतुर्थ सूर्य ` शुक्र हो तो साहुकार या राजा के घर का कार्यवाही हो ( प्रा. यो. ) । १८३--व्यय में गुरु, तृतीय में चन्द्र, षष्ट में शुक्र, लाभ में बुध हो लग्न में मकर का शदि हो तो एक छत्र राज्य भोगे ( शंभु. ) ।