सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 376, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३६६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
१२९--वृश्चिक का गुरु, कुम्भ का शनि, सिंह का सूर्य हो, वृष का चन्द्र लग्न में हो तो अवश्य राजा हो या वकील, मजिस्ट्रेट या व्यापारी हो (वृ० जा०) । २००--धनु राशि में गुरु चन्द्र हो, लग्न में बुध या शुक्र उच्च का हो मकर का मङ्गल हो तो इन्द्र के समान धरती का स्वामी हो। इसमें १२ और ६ लग्न से २ भेद 'हो जाते हैं (जा० भ०) ।
२०१- धनु राशि में गुरु,लग्न में मेष का सूर्य, सप्तम में शनि चन्द्र हों तो राजा हो (बृ० जा०) ।
२०२--धनु राशि में गुरु, लग्न में मेष का सूर्य चन्द्र हो, मकर का मंगल कुम्भ का शनि हो तो राजा हो (वृ० जा०) ।
२०३--अन्य मत से धनु का गुरु, लग्न में सिंह का सूर्य, मेष का चन्द्र, मकर का मंगल, कुम्भ का शनि हो तो राजाओं का राजा हो (शंभु०) ।
२०४--धनु राशि में गुरु, लगन में मेष का चन्द्र, मङ्गल उच्च का, शनि कुम्भ 'का हो, सूर्य मर्द्ठोदय स्थिति में हो तो राजपुत्र राजा हो (जा० सं०) ।
२०५--धनु के ३ अंश पर गुरु हो, कुम्भ के १५° पर शनि हो, कर्क के १० पर चन्द्र हो तो राजा हो । इसी योग में चन्द्रमा सिह का हो तो भी राजा हो (शंभु०) । १०६--धनु में गुरु, ककं में बुध हो दोनों सूयं और मंगल से दृष्ट हों तो राजा हो (जा० भ०) 1
२०७--धनु का गुरु नवम भाव में पञ्चमेश या शुक्र से युक्त हो तो राजा हो (बृ० पा०) । २०८--धनु का गुरु, तुला में शुक्र व सूर्य हो, लग्न में मकर का शनि, मीन का चन्द्र, मिथुन का मंगल, कन्या का बुध हो तो कीतिमान् राजा हो या राज घराने में न्ययाधीश डाक्टर आदि हो धमंशील व उदार हो (प्रा० यो०) । १० ५-7 धनु का गुर या चन्द्र, मकर या मंगल, अपने उच्च में शुक्र या बुध हो, मीन ऊर्न हो तो राजयोग होता है (प्रा० यो० )1 २१०--धन का गुरु, चन्द्र या शुक्र हो, कन्या लग्न हो, मकर का शनि और मंगल हो तो राजकुल के वाहन का स्वामी हो, या कामदार दुकानदार आदि हो (प्राण्या०) २११--धन का गुरु चन्द्र शुक्र युक्त हो, लग्न में उच्च का बुध हो मकर में शनि मंगळ हो तो सेवा वाहन युक्त राजा हो (जा० भ०) ।
२१२->धन का गुरु सप्तम, व उच्च का सूर्य लग्न में हो या मंगल चन्द्र के साथ उच्च का हो या शनि चन्रयुक्त उच्च का हो तो पराक्रमी राजा हो (प्रा० यो०) । २१३-११ राशि में गुरु, मेष में सूर्य, मकर में मंगल हो तो राजा हो (जा० पारि०) |
२१४--भकर में गुरु, कुंभ में सूये, मीन में मंगल, घन में शुक्र हो तो ३० वर्ष में सब काम करने में समय हो (७० चं०) ।