सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंराजयोग : ३६७
। २ शमीन में गुरु शुक्र और चन्द्र तीनों हों तो राजा हो अनेक पुत्र हों
मान०) ।
२१६--मीन लग्न में गुरु शुक्र हो, मेष का सूर्य मकर का मंगल हो तो छत्रधारी राजा हो (मान०) ।
२१७--मीन में गुरु, घन भाव में शुक्र और मंगल हो, कुम्भ में बुध या सूर्य के साथ i का चन्द्र हो तो विभवयुक्त राजा हो दान भोग में सामान्य विख्यात हो (मान०) ।
२।८--मीन में गुरु, घन भाव में शुक्र मंगल, तुला में बुध हो और शनि चन्द्र
नीच स्थिति में हों तो राजयोग होता है । धन रहित राजा हो, दाता, योगी, पूज्य
और मंडल भर का नायक हो (छ० चं०) ।
२१९--मीन में गुरु चन्द्र शुक्र हों, लग्न में उच्च का बुध हो वक्री शनि मकर
का हो तो राजा हो (जैमिनि) । २२०--मीन में गुरु चन्द्र, मिथुन में शुक्र, लग्न में कन्या का बुध, मकर का
मंगल शनि हों तो शत्रुओं का नाशक बड़ा राजा हो (जा० भ०)।
२२१--छरन लाभ या दशम में गुरु, शनि, मंगल हों, चन्द्र से केन्द्र मों लाभेश,
नवमेश, द्वितीयेश में से कोई हो ओर यदि गुरु २, ५ या ११ भाव का स्वामी हो तो
वह समाज का स्वामी हो (फल०) ।
शुक्र के योग (गुरु के योग छोड़कर)
२२२--उच्च में शुक्र बुध हो तो राजाधिराज हो (जा० सं०)"।
२२३--केन्द्र में शुक्र बुध हो तो वह वाहन, सेवक, रत्न, बगीचा आदि से परि-
पूर्णं समुद्र तट का रहने वाला सत्यवादी राजा होता है (जा० सं०) ।
२२४ केन्द्र में शुक्र हो तो सुन्दर दीर्घायु सब में समर्थ धन सुवणं वाहन से पुणे
हो (मान०) ।
२२५--अकेला शुक्र केन्द्र, लाभ, जन्म राशि में, तीसरे स्थान में या त्रिकोण में
हो तो विद्या और विज्ञान से युक्त विख्यात कीति, दानी, मानी, शूरवीर, अश्वविद्या
जानने वाला, हाथियों से सेवित राजा हो (मान०) ।
२२६- शुक्र बुध सूर्यं अपने नवांश में होकर चन्द्र से ३,६,८, घर में हों, सूर्य
मूल त्रिकोण या उच्च में हो तो अन्य कुल का भी राजा हो (जा० पारि०)।
२२७--लग्न या दशम में शुक्र बुध हो तो बहुत धनवान् हो (प्रा० यो०)।
२२८--दूसरे भाव में शुक्र युक्त बली लग्नेश हो वह उसका नीच या शत्रु घर
न हो तो राजा हो (फल०) ।
२२९-२, ३, ४ भाव में कहीं शुक्र हो ओर ६-१० भाव में सब ग्रह हों तो
राजयोग होता है । तुच्छ कुळ का भी राजा हो (जा० सं०) ।
२३०--द्वितीय भाव में शुक्र हो शत्रू, या नीच घर में न हो, लग्नेश बली हो तो
राजा हो (जा० पारि०) ।