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भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 378, कुल 454 में से

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३६८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

२३१-३, ११, घर में परस्पर दृष्ट शुक्र चन्द्र हो या कहीं पर परस्पर दृष्ट

हो तो राजयोग होता है (वृ० पा०) । ee

परस्पर दृष्टि तृतीय एकादश में, यदि एक स्थिर में दूसरा चर में हो तो राशि

दृष्टि वश परस्पर दृष्टि होती है जैसे एक वृष में दूसरा कर्क में ।

२३२-_चतुथं में शुक्र, तीसरे में सूर्य, २ या ५ में बुध हो पर कोई नीच के ग्रह

न हों जो १० या १२ भाव में न बंठ हों तो समुद्र पर्यन्त भूमि का पालन करता राजा

होता है (मान०) ।

अन्यमत--४ घर में शुक्र, ३ में सूयं, २ या ५ घर में बुध हो पर नीच दो शत्रू,

गृही ग्रह न हों तो उपरोक्त फल हो (जा० सं०)।

२३३--चतुर्थ में स्वगृही शुक्र, नवम में चन्द्र शेष ग्रह सूर्यं मंगल बुध गुरु शनि

३,१,११ भाव में यथा सम्भव हों तो राजवंशी राजा हो अन्य धनी हो । इसमें कुम्भ

और कक लग्न से २ भेद हो जाते हैं (वृ० जा०) ।

२३४--चतुर्थ में शुक्र बुध हो, तीसरे सूर्य शेष ग्रह पंचम में हों पर शत्रु गृही न

हों तो एक छत्रधारी राजा हो (जा० भ०) ।

२३५--चतुर्थं में शुक्र, दशम में मंगल सूर्य शनि युक्त हो तो राजा हो (मान०)

२३६--चतुर्थ में शुक्र ओर सूर्यं ह तो राजयोग होता है (फल०) । २३७--अष्टम में शुक्र, लग्न मों मकर का शनि, सप्तम सूर्य चन्द्र, लाभ में मंगल

हो तो राजवंशी राजा हो (जा० भ०) ।

२३८--अष्टम में शुक्र, लग्न में शनि और चंद्र हो तो मानी, बहुत मित्रों वाला, अभिमानी, स्त्री में रत राजा हो (मान०) ।

२३९--अष्टम में शुक्र, नवम में सूर्य, पंचम मंगल, छठे राहु हो तो कुल का पालक हो (ल० चं०) |

२४०--नवम शुक्र, दशमं पूर्ण चन्द्र, छाभ में शेष ग्रह हों तो राजवंशी राजा हो (शंभुः) । २४१--दशम में मित्रांश में शुक्र सूय चन्द्र बुध हो, शत्र, गृही, अस्त या नीच में न हो तो हाथी आदि युक्त राजा हो (जा० पारि०) । २४२--दशम में स्वगृही शुक्र या मंगल हो शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो राजा हो (शंभु०) ।

र४३--छाभ या व्यय में शुक्र हो, धनु लग्न में वली सूर्य हो, दशम में चन्द्र और मंगल हो तो इन्द्र के समान राजा हो । यह योग पृष के महीने में होना सम्भव है (जा० पारि०) ।

२४४--बली शुक्र ११ या १२ भाव में हो तो राजा हो (जा० पारि०) । २४५--व्यय में मीन का शुक्र बुध हो लग्न में सूर्य, द्वितीय में चन्द्र, तीसरे में राहु हों तो राज योग होता है (मान०) ।