भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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राजयोग : ३६९

२४६-णवृप का शुक्र, तुला का चन्द्र हो शेष ग्रह क्रम से १,११,९ रोशियों में हों तो साहुकार या जज हो (प्रा० यो०) ।

२४७-वृप में शुक्र उदय हो और ग्रह नीच, शत्रुगृही या अस्तंगत न हों बलवान्‌ हों शतरुयुक्त न हों तो बलवान्‌ देव तुल्य क्रोध रहित राजा हो (जा० भ>) । २४८--केन्या का शुक्र राहु मंगल शनि हो तो कुवेर से भी अधिक धन मिले (मान०) । ५ २४९-कन्या राशि में शुक्र बुध हो, मकर लग्न हो, शुक्र नीच का हो बुध नोच भंग और राजयोगकारी है उसके बल से शुभ फल देगा (ज्यो० शा०) । २५०-तुला में शुक्र, मकर लग्न में शनि, सिंह का सूर्य, मिथुन में बुध, मेष का मंगल, कर्के में चंद्र हो तो समुद्र तक पृथ्वी का राजा हो (वृ० जा०) । २५१-तुला का शुक्र हो, कर्के लग्न हो, मोन का चंद्र हो शेष ग्रह ५, ध्या २ राशियों में हों तो राज कार्यवाही या साहुकार हो (प्रा० यो०) । २५२-तुला का शुक्र हो, सूर्य स्वगृही हो, मिथुन में शनि हो तो राजयोग होता है (मान०) ।

२५३-मीन पर शुक्र, व्यय में बुध, लग्न में सूर्य, धनभाव में चंद्र, तोसरे में राहु हो तो राजयोग होता है (जा० सं०) । : २५४-मीन पर शुक्र, ब्यय में बुध, लग्न में सूर्य, घन में राहु और तीसरे भाव में मंगळ हो तो राजयोग होता है (ल० चं०) ।

२५५-मीन का शुक्र केन्द्र में हो तो विद्या कला तथा गुणों से सुशोभित, भोग से पूर्ण अपने देश रियासत शहर या ग्राम आदि में दौरा करने से धान्त, सम्पूणं मंडल भर में जिसका शासन हो ऐसा होता है (मान०)।

२५६-लग्न में मीन का शुक्र प्रकाशवान्‌ हो तो विद्या कळा अनेक भोगों से युक्त देशकी अधिकता और पुरजनों में विराजमान हो (जा० सं») ।

२५७-छग्न में मीन राशि में मीन नवांश में शुक्र हो तो राजा हो (जा.पारि.) ।

२५८-जिक भाव को छोड़ कर अन्य भाव में शुश लग्नेश युक्‍त हो तो राज पूज्य

हो इच्छित फल प्राप्त करे (जा० ल॑०) ।

२५९-१,२,७,१२ राशि में शुक्र हो तो राजाओं से मान पाने वाला कला कौतुक का ज्ञाता हो आयु २३ वर्ष (मान०) !

२६०- ',७,२,१२ राशि में शुक्र हो तो राज मान्य कला कौशल युक्त हो ३ पुत्र हों २२ वर्ष में भोग को प्राप्त करता है (जा० सं०) ।

२६१-शुक्र कर्क का हो, लग्नगत क्रुर ग्रह हो गुरु से दृष्ट हो तो देव ब्राह्मणों का

भक्त हो, महल, बावली, नगर बनाने वाला राजा हो (शभु०) ।

२६२-शुक्र अश्विनी, कृतिका, पुष्य, रेवती इन नक्षत्रों में हो तो राजा हो

(जा० म०) ।

२६३-शुक्त अश्विनी नक्षत्र में लग्न में हो ओर सभी ग्रह उसे देखते हों तो राजा

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