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भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 380, कुल 454 में से

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पृष्ठ 380

अ? आड

३७० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

हो राजकुल में अग्रज शत्रु संहारक बहुत स्त्रियों से विलास करने वाला हो (जा.सं.) ।

२६४-अश्विनी में शुक्र हो तो राजा होता है (जा०भ०) ।

२६५-अश्विनी नक्षत्र में शुक्र लग्न में हो या अधिक ग्रहों की दृष्टि हो तो शत्रु

नाशक राजा हो (फल०) । ८

बुध से राजयोग ( गुरु और शुक्र का फल छोडकर )

२६६-केन्द्र में बुध हो और चन्द्र जिसकी राशि या नवांश में हो वह केन्द्र कोण

या लाभ में हो तो राजाओं का राजा हो (स० चिं०) ।

२६७-वुध. गुरु की दृष्टि हो और पूर्णं बली लग्नेश केन्द्र में हो तो वह राजा हो जिसकी आज्ञा सब मानें (स० चिं०) ।

२६८-बुध को गुरु देखता हो तो वह राज कुल में उत्पन्न राजा विचित्र सम्पत्ति युक्त हो (शंभु०) । २६९-बुध सूर्य एक भाव में हों तो बुधादित्य योग होता है वह धर्मात्मा पंडित नवान्‌, बहु पुत्रवान्‌, भृत्यों सहित जितेन्द्रिय हो (जैमिनि) । २७०-बुध सूर्य के साथ अक्त होकर भी यदि स्वगृही या मूल त्रिकोण में हो तो प्रत्येक विद्या का जानने वाला हो (जा० पारि०) । २७१-छण्न में बुध, नवम पंचम में शुभ ग्रह, शेष ग्रह उपचय में हों तो बड़ा साहुकार जज आदि हो ( प्रा० यो०) । २७२-दुसरे भाव में बुध मंगल हो तो राज योग होता है (फल०)। २७३-चतुर्थ भाव में बुध और सूयं हो, दशम में शनि चंद्र, लग्न में मंगल हो तो राजा हो (जा० पारि०) ।

२७४-दशम में बुध सूर्य, षष्ठ में मंगल राहु हो तो राजा हो (जा० सं०) । २७१५-छाभ में बुध, मेष में सूर्य, ककं लग्न में चंद्र हो तो डाक्टर हो (प्रा.यो.) । २७६-बुध मिथुन के २१ अंश में हो,कुंभ के अंत्यांश अर्थात्‌ कुंभ कुंभांशक (वर्गोत्तम) में चन्द्रमा हो या त्रिकोण में १२-१ राशि का मंगळ हो तो राज वंशी राजा हो (शंभु) ।

२७७--मिथुन के ११वें अंश में बुध हो, त्रिकोण में चन्द्र कुम्भ राशि के अष्टम नर्वाश में हो, मेष के ७वें अंश में मंगल हो तो राजा हो (जा० भ०) । २७० कन्या राशि में बुध चन्द्र युक्त हो तो मगध देश का राजा हो (जा०भ०) ! २७९-कन्या में बुध हो, सिंह में सूर्य हो परन्तु शुक्र के नवांश में हो तो नीच कुल का भी राजा हो। भाद्र मास में इस योग की संभावना रहती है (जा० पारि०)। २८०--वुध, चन्द्र मंगल शनि क्रमशः ६, १२, ४, ९, १० राशि में हों तो राजा हो (जा० पारि०) । चन्द्र का राजयोग (उपरोक्त योग छोड़कर) २८१--पूण चन्द्र अकेला प्रधान बल से युक्त हो तो शत्रुओं का दमन कर्ता राजा हो (जा० पारि०)।