सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 381, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंराजयोग ३७१
२८२--चन्द्र उच्च में हो तो सहस्रपति हो, यदि नीच में या अन्य राशि में हो
तो अनुपात से फल जानना ।
२८३--षड़ वर्ग में शुभ ग्रह उच्च के समान फल देते हैं ( जा० सं० ) ।
२८४--चन्द्र वर्गोत्तम नवांश में हो या लग्न में वर्गोत्तम नवांश उदय हो रहा
हो, चन्द्र को छोड़ कर और किसी ग्रह से दृष्ट हो तो नीच कुल का राजा हो (फल०)।
२८५--चन्द्र वर्गोत्तम होकर बली ग्रह से दृष्ट हो लग्न में कोई पाप ग्रह न हो
तो सुन्दर शरीर हो और राजाधिराज हो ( फल० ) ।
२८६ - वर्गोत्तम चन्द्र पुष्य, अश्विनी या कृतिका में हो तो धरती का राजा हो ( शंभु० )। हु
२८७--पूर्ण चन्द्र वर्गोत्तम हो तो शक्ति मान राजा हो बहुत वाहन युक्त कीति-
मान् हो ( फल० ) ।
२८८--पूर्ण चन्द्र वर्गोत्तम नवांश में हो और उस पर ३ या अधिक ग्रहों की
दृष्टि हो तो राजा हो ( वु० पा० )।
२८९--बली चन्द्र केन्द्र त्रिकोण में हो तो दोनों कुल को आनन्द देनेवाला पृथ्वी
का राजा होता है | सबं विघ्न नाश होते हैं ( जा० सं० ) ।
२९०--केन्द्र या त्रिकोण में वली चन्द्र हो उस पर गुरु की दृष्टि हो तो धन
शक्ति और प्रभाव में राजा के वराबर हो । पूर्ण चन्द्र हो, शुक्र के गृह या भश में हो
कोई पाप दृष्टि या-योग न हो और गुरु या शुक्र से दुष्ट हो या उच्च में हो तो वस्त
बलवान् होता है ( जेमिनि ) ।
२९१--चन्द्र का नवांशेश लग्न से केन्द्र या कोण में हो या बुध से केन्द्र में हो तो
राजा के वरावर हो राजा द्वारा मान प्राप्त करे ( स० चि० ) ।
२९२--पूर्ण बली चन्द्र लग्न से अतिरिक्त ४,७,१० भाव में हो तो विक्रम, सेना,
वाहन युक्त राजा हो ( शंभु० ) ।
२९३- पूर्ण बली चन्द्र केन्द्र में हो उस पर गुरु शुक्र की दृष्टि हो तो राजा हो
(जा० पारि०) ।
२९४---पूर्ण बली चन्द्र लग्न को छोड़कर केन्द्र में उच्च का हो तो राजा दो
(जा० भ०) । 6
Ma राशि या लग्नेश वक्री होकर केन्द्र में हो तो नीच कुल में भी
उत्पन्न हुआ, उदार पवित्र आचरण करने वाला राजा हो (जैमिनि) ।
२९६--केन्दर में चंद्रमा त्रिकोण में सूर्य हौ तो दास कुछ में भी उत्पन्न हुआ राजा
हो (मान-) |
२९७--केन्द्र में चन्द्र हों तो रूपवती स्त्री मिले धन सुवण रत्न युक्त चन्दन लगाने
वाला हों (मान०) । न
१९८--पूर्ण चन्द्र सूर्यं के नवांश में हो शुभ ग्रह केन्द्र में पाप रहित हो तो कई
हाथी युक्त हो (फल०) ।