सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 382, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंoe ६4: SECPP
३७२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
२९९--त्रिकोण या लाभ में चन्द्र हो तो दोनों कुछों को आनन्द दायक, अंधकार नाश करने में दीपक के समान हो (मान०) ।
३००--४,१०,११ भाव में चन्द्र शनि युक्त हो तो राज कुल में उत्पन्न होने वाला राजा हो । अन्य राजा के सदृश धनी हो (जा० पारि०) । ३०१--६,७,८ भाव में चन्द्र हो उसे सूर्य को छोड़कर सब ग्रह देखते हों तो दीर्घायु राजा हो (मान.) । २
३०२--६,७,८ भाव में चन्द्र हो वृश्चिक राशि में न हो ओर सब ग्रहों से दृष्ट हो तो दीर्घायु राजा हो (ल० चं०) । १ द ३०३--६:८ भाव में चन्द्र हो सूर्य को छोड़कर सब ग्रह देखते हों तो दीर्घायु राजा हो (जा. सं.) ।
३०४- चन्द्रमा सूयं से युक्त हो उच्चादि वर्ग में हो सप्तम भाव में हो शुभाशुभ ग्रह से दृष्ट हो तो चञ्चल राजा हो या राजा के समान हो (जा. पारि.) । ३०५-उपचय में चन्द्र हो और सब ग्रह अपने-अपने घर या नवांश में या केन्द्र में हों और पाप ग्रह निर्बल होकर कहीं भी बैठे हों तो विशेष कर सेना से युक्त इन्द्र के समान राजा हो (मान.)
३०६--चन्द्र उपचय में हो तो इन्द्र के समान राजा हो (जैमिनि) । ३०७--उपचय में स्वगृही या स्वनवांश का चन्द्र हो (शुभ ग्रह केन्द्र में हो पाप ग्रह निर्वळ हों तो इन्द्र के समान वली राजा हो (जा. सं.) । ३०८--ऊम में चन्द्र हो लग्नेश नवम-दशम में हो तो राजा हो (जा, पारि.) । ४३०९--छनन में पूर्ण चन्द्र हो, ३ शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो शत्र गृही या नीच के वर्ग में न हो परन्तु अपने वर्ग में होने से वली हो तो शत्रु ओं को दमन करता राजा हो (फल.) ।
३१०--लग्न में जल राशि या अंश में चन्द्र हो या अपने वर्ग में हो तो प्रजा की भलाई करने वाला राजा हो (फल.) । ३११--धन भाव में चन्द्रमा दशमेश युक्त हो और समस्त ग्रह लग्न से ६ भाव तक हों तो राजा हो: (स. चि.) । ३१२--चतु्थ में चन्द्र, छठे मंगळ, अष्टम शनि हो तो रुजा के दर्शन करने वाला हो (जा. सं.) ।
रै१३--र या ३ भाव में चन्द्र मंगल युक्त हो और राहु पञ्चम हो तो राजा के बरावर हो (स. चिं.) ।
३१४--सप्तम में चन्द्र सूर्य युक्त हो, मकर में बली मंगल, ९ या १० भाव में शनि हो तो चञ्चल ।चत वाळा हो (जा. पारि.) । ३३५--नबम में चन्द्र हो, लग्नेश उपचय में हो शुभ ग्रह वळवान् होकर केन्द्र में शुभ नगे में हो तो राजा हो ( जा० पारि० ) । ३१६-गबय में यूज चन्द्र युक्त गनि या मंदरू हो या दोणों हों तो राजा हो (शंभू)