भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 383, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 383

राजयोग : ३७३

३१७--नवम में पूर्ण चंद्र सूर्य मंगल युत बल युक्त हो शुभ दृष्ट हो तो राजा या मंत्री हो ( जा० भ० )1

३१८--पूर्ण चन्द्र नवम में उच्च का या मित्र गृही हो लग्न से २ या १० स्थान

में शनि और मंगल हों तो राजा हो ( जा० पा० ) |

३१९--नवम में सूर्यं ओर चन्द्र दोनों हों राहु बारहवें हो तो राजा के समीप रहने

चाला हो ( जा० सं० )। न

३२०--दशम भाव में चन्द्र हो व्यय भाव में कोंई शुभ ग्रह हों और क्रूर ग्रह की

राशि का चन्द्र हो तो राज्य प्राप्ति हों ( मान० ) ।

३२९--दशम में चन्द्र हो नवम में भी शुभ ग्रह हो पंचम में भी शुभ प्रह हो तो राज योग होता है ( ल० चं. ) |

३२२--दशम में पूर्ण चन्द्र हो शुभ ग्रहों से युक्त व दृष्ट हो तो राजा हो (जा. पा.) । ३२३--प्रकाशित चन्द्र पर उच्च या स्वगृही ग्रह की दृष्टि हो पूर्ण चन्द्र लग्न को छोड़कर केन्द्र में हो तो नीच कुछ का भी वाहन युक्त राजा हो ( जा. भ. ) । ३२४-पूर्णे चन्द्र को गुरु, वुध, शुक्र तीनों देखते हों तो राज कुल में उत्पन्न हुआ राजा हो ( जा. भ. )

३२५--चन्द्रमा लगेश के अतिरिक्त ग्रह से युक्त हो और वुध गुरु शुक्र से दृष्ट हो तो राजा हो (जा. पा. ) ।

३२६--चन्द्र पर नवमेश की दृष्टि हो ओर सब ग्रह लग्न से ६ भाव तक हों चन्द्र भी इसी के भीतर हो तो राजा हो (स. चि. )।

ग्रह नीच का हो तो राज योग में अन्तर पड़ेगा ।

३२७--चन्द्र पर उच्चगत लग्नेश की दृष्टि हो तो वह हाथी घोड़े सेनाओं से परिपूर्ण अनेक शत्रुओं को जीतने वाला राजा हो ( जा. पा. ) ।

३२८--चन्द्र पर सूर्य बुध की दृष्टि हो और सूर्य पर चन्द्र की दृष्टि हो तो

पृथ्वी पति राजा हो ( मान.) ।

३२९--चन्द्र पर बुध की दृष्टि हो और सूर्य पर चन्द्र की दृष्टि हो या उसके मित्र ग्रह की दृष्टि हो तो राजा हो ( ज॑मिनि ) ।

३३०--चन्द्र जिस राशि में हो उसका स्वामी उसे देखे या उसके मित्र ग्रह देखें

तो राजा हो ( जैमिनि ) |

३३१--छग्न चन्द्रमा समस्त ग्रहों से दृष्ट हो तो राज्य देने वाले होते हैं (शंभु.) ।

३३२--चन्द्र सब ग्रहों से दृष्ट हो तो राज कुल में उत्पन्न राजा हो । अन्य कुल का भी कुल में श्रेष्ठ घन अन्न नोतियुक्त हो ( शंभु. ) ।

३३३--वष के चन्द्र पर गुरु और शुक्र की दृष्टि हो तो राजा हो (जा. भ.) ।

३३४--वृष लग्न में चन्द्र हो उसे अन्य ६ ग्रह देखें तो राजा हो (जा. पा.) ।

३३५--रात्रि का जन्म हो दशम भाव में ककं का चंद्र हो शुभ ग्रह अस्त नीच