सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 384, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३७४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
शत्रु गृही न हों और ३, ६, ११ घर में हों या परमोच्च के हों या सब केन्द्र में हों तो
राजाधिराज हो ( फल. ) ।
३३६--षड़ वर्ग शुद्धि चन्द्रमा ककं का पुनवंसु नक्षत्र पर हो या उच्च पंचम
नवंम में हो तो समुद्र तक धरती का राजा हो ( जा. भ. )।
३३७--कर्क का चन्द्र सिह का सूर्य हो दोनों गुरु से दृष्ट हों तो राजा हो (शंभु.)।
३३८--कर्क का चन्द्र हो, लग्न में सूर्य, शनि कुम्भ में हो शुक्र से दृष्ट हो तो
राजा हो ( जा. भ. ) ।
३३९--ककं का चन्द्र हो लग्न में मकर का मंगल हो तो राजा हो (जा. पा.) ।
३४०--क्क का चन्द्र हो शुभ ग्रह युत या दृष्ट हो और सभी ग्रह शोर्षोदय राशि
३, ५, ६, ७, ८. ११ में हों तो राजा हो ( जा. पा. ) ।
३४१--करक का चन्द्र मीन का सूर्य हो तो राजा हो ( जा. पा. )।
३४२--कर्क का चन्द्र हो सब शुभ ग्रह पंचम में या नवम में हों तो राजयोग
होता है ( जा. सं. ) ।
३४३--कन्या लग्न में चन्द्र हो सिंह में सुर्य, मकर में मंगळ, कुम्भ में शनि हो
तो बड़ा तेजस्वी राजा हो ( शंभु. ) ।
३४४---मीन लग्न में चन्द्र हो, सिंह का सूर्यं, मकर का मंगल, कुम्भ का शनि हो
तो तेजस्वी राजा हो ( जा. भ. ) ।
३४५--मेष का चंद्र हो, सिंह का सूरये लग्न में, कुम्भ का शनि, मकर में मंगल,
घन का गुरु हो तो राजाओं का राजा हो ( आ. भ. )।
३४६- धनु के पूर्वाद्ध में चन्द्र और सूर्य हो, लग्न में बली शनि हो, मकर में
मंगल हो तो महाराजा हो जिसे दूसरे प्रणाम करें (ल. चं. ) ।
३४७- धनु में सूयं चन्द्र, मकर लग्न में मंगल या शनि हो या कुंभ लग्न में
शनि हो तो (ये २ राजयोग हुए) मुन्सिफ वकील बड़ा साहूकार आदि हो (प्रा. यो.) ।
३४८--मकर लग्न में चन्द्र मंगल हो, सूर्य धन का हो तो राजा हो (वृ. जा.) ।
३४९--मीन में पुणं चन्द्र हो भित्र ग्रहों से दृष्ट हो तो महत्वपुर्ण राजा हो (फल.)
या सर्व ग्रहों की दृष्टि हो तो भी उपरोक्त फल हो ( जा. भ. ) ।
३५०--मीन में पूणं बली चन्द्र मकर का मंगल कुम्भ का शनि हो तो राजा हो
( जा. पारि. )।
३५१--पूणं चन्द्र गुरु के घर में हो शनि ओर मंगल १०,५ या १ भाव में हो
तो राजा हो ( जा. पारि. ) ।
३५२--बलवान् चन्द्र शुभ राशि में हो तो राजा हो ( शंभु० ) ।
३५३--जळचर राशि का चन्द्र हो, लग्न में सूयं. कुम्भ में शनि हो शुक्र से दृष्ट
हो तो राजा हो ( शंभु० ) । `
३५४ भेष सिंह लग्न में चन्द्र सूय हों तो साधारण मजिस्ट्रेट आदि हो (प्रा.यो.) ।