भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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राजयोग : ३७५

३ कय अधिमित्र के घर हो शुक्र की दृष्टि हो तो धनयुक्त राजा हो फल० ) ।

३५६--चन्द्र अधिमित्र के अंश में हो और गुरु से दृष्ट हो तो पृथ्वी भर का राजो हो ( फल० ) ।

चन्द्रमा स्वनवांश में हो गुरु से दृष्ट हो तो भी उपरोक्त फल हो ( जा० भ० )। ३५७--रात्रि का जन्म हो चन्द्र मित्र नवांश में हो शुक्र से दृष्ट हो। दिन का

जन्म हो चन्द्रमा स्वनवांश या अधिमित्र नवांश में हो गुरु से दृष्ट हो तो राजा हो ( जैमिनि ) । सूर्य से राज योग (उपरोक्त योग के अतिरिक्त) ३५८-~उच्चाभिलाषी सूर्य त्रिकोण में हो तो नीच कुल का भी धन पूर्ण राजा हो ( छ० चे )। ३५९--सूर्य शनि उच्च में हों तो सब का स्वामी हो ( जा० सं० ) ।

३६०-ूर्यं अपने स्वअंश में हो और अपने स्वक्षेत्र में हो तो घोड़ा, हाथी युक्त राजा हो ( फछ० ) ।

३६१--सूर्यं अपने अधिमित्र के घर में वैठा हो ओर चन्द्र से दुष्ट हो तो वह चोरों के समूह में श्रेष्ठ शील वाला निरन्तर राजा होता है ( जा? भ० ) । सूये अधिमित्र के अंश में हो चन्द्र से दृष्ट हो तो भी उपरोक्त फल हो (शंभु०) । ३६२--वली सूर्य पर पंचम स्थित गुरु की दृष्टि हो ओर एक भी उच्च का शुभ ग्रह केन्द्र में हो तो राजा हो ( जेमिनि० ) 1

३३३--वलवान्‌ सूर्य केन्द्र या त्रिकोण में हो तो सब दोषों को दूर कर बड़ी आयु

वाला रोग भय से रहित करता है ( जा० सं० ) ।

३६४--मेथ का सूर्यं चन्द्र युक्त हो तो राजा हो ( जा० भ० )।

३६५-स्वगृही सये नवम में हो तो भाई नहीं जीता जिये तो राजा तुल्य हो

( छ० चं० )।

३६६--दशम में सूर्य और मंगल, सप्तम में शनि ये अच्छे हूँ यद्यपि पाप ग्रह

केन्द्र कोण में बुरे होते हैं परन्तु वे अच्छे हैं।

दशम में सूर्यं मंगळ हो, दशमेश केन्द्र में हो तो कड़ी आज्ञा देने वाला हाकिम हो

स० चि० ) ।

३ ७ ३,१,७,४ राशि में से किसी में सूर्य हो मकर लग्न में शनि हो तो

यशस्वी राजा हो ( शंभु० ) 1 मङ्गल के राजयोग (उपरोक्त योगों के अतिरिक्त) । डु न

३६८--मंगल अनुराधा नक्षत्र या अश्‍विनी नक्षत्र में या अपने ऊंच मकर में या

वर्गोत्तम नवांश में हो तो राजवंशी राजा हो अन्य वंशी धनी या मंत्री हो (जा. भ.) ।

३६९-- मंगल उच्च का बली हो, सूर्य, चन्द्र या गुरु से युक्त हो तो समस्त भूमण्डल का पालक राजा हो ( जा० पारि० ) ।