सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 386, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३७६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
२७०--बली मंगल केन्द्र में हो सूर्य चन्द्र तथा गुरु से दृष्ट हो तो राजा हो ( ज॑मिनि० )। ३७१-१, ५, ९, लगन में मंगल हो मित्र ग्रहों से दृष्ट हो तो राजा हो मान पाये ( फल० ) ।
३७२--सिंह में मंगल, मिथुन में राहु हो तो राजा पिता के सम्पूणं द्रव्य को प्राप्त हो हाथी घोड़ों का पालन करता राजा हो ( मान० ) । ३७३--मंगळ दशम हो तो राजयोग होता है ( जा० सं० ) । ३७४-९, ११ भाव में मंगल ओर शनि हो, १, ७, १० भाव में बली शुभ ग्रह हो तो गुणवान् राजा हो ( जा० पारि० ) । २७५--चतुर्य भाव में मंगल युक्त चतुर्थेश हो या वली चतुर्थेश लाभ में हो, यदि मंगल की राशि में चतुर्थेश हो तो राज्य धन, सुख, वाहन, रत्न आदि प्राप्त हो ( स० चि० ) | शनि के योग ( उपरोक्त के अतिरिक्त ) ३७६--शनि उच्च का या स्वगृही केन्द्र में हो तो राजातुल्य हो ( मान० ) । ३७७- लग्न में शनि उच्च या स्वराशि का हो तो राजा के समान देश, पुर का स्वामी होता है । ( जा० सं० ) । उबत लक्षण हीन शनि हो तो दरिद्री, दुःख शत्रु से पीड़ित निदित होता है अर्थात् शेष राशियों का शनि लग्न में हो तो अच्छा नहीं होता । ३७८--शनि उच्च या मूल त्रिकोण का केन्द्र या कोण में हो और दशमेश से दष्ट हो तो राजाके तुल्य हो ( स० चि० )1 ३७९- शनि उच्च या मूल त्रिकोण का केन्द्र या कोण में हो ओर छाभेश से दृष्ट हो तो राजा सम धनी हो ( जा० पारि० )। * ३८०--काभ में शनि हो नवमेश से दृष्ट हो, दशम में राहु हो, लग्नेश नीच गत या नीच ग्रह युक्त न हो तो राजा के तुल्य हो ( जा० पारि० ) । ३८१--१,७,९,१०,११, १२ राशि के लग्न में शनि हो तो सुन्दर शरोर वाला राजा विद्वान् और पुर या ग्राम या मुखिया हो ( जा० पारि० )। ३ै८२--७,९, १२ राशि के लग्न में शनि हो तो राजा कुछ का राजा हो ( छ० चं० ) |
२८३--कग्न से दशम में बली शनि हो तो धनवान् बुद्धिमान् शूरवीर राजा का मन्त्री दण्ड देने वाला या नेता हो (मान,) । ३८४--शनि दशमेश युक्त हो तो क्र आज्ञा देने वाला हाकिम हो (स. चि.) । ३५५--शनि दशमेश ओर अष्टमेश युक्त होकर केन्द्र या कूर अंश में हो तो कठोर आज्ञा देने वाला हो (स. चिं.) । ३८६--दशमेश जिसके नवांश में हो वह शनि से सम्बन्धी हो पष्ठेश का भी सम्बन्धी हो तो उसके बहुत दास हों (स. चिः) ।