भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 394, कुल 454 में से

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३८४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

४९२--लग्न में शुभ ग्रह अष्टम में कूर ग्रह हो तो ध्वज योग होता है जातक श्रेष्ठ हो ( छ० चं० ) ।

४९३--जन्म ऊषा काल का हो या अभिजित काळ या गोधूलि या महानिशा में हो तो ग्वाल पुत्र भी राजा हो ( जॅमिनि० ) ।

४९४--मध्याल्न या अढ रात्रि के वाद २॥ घड़ी शुभ समय होता है उसमें जन्म

लेने वालो राजा होता है ( वृ० पा० ) ।

४९५--पाप ग्रह लग्न में हो गुरु से दृष्ट हो तो राजा हो ( जा० भ० ) । ४९६--लग्न में चर राशि हो लग्नेश चर राशि चर नवांशक में हो. तो प्रभाव

शाली राजा हो ( स० चि० ) ।

४९७--लग्न दशम या लाभ ही के सन्मुख सम्पूर्ण ग्रह हों तो कारक योग होता है इसमें नीच कुल का भी राज्य प्राप्त करे ( ल० पं० ) ।.

अन्य भाव के योग ४९८--लग्न से ६,८ स्थान में शुभ ग्रह हो पाप ग्रहों से युक्त दृष्ट न हो तो बहु मंत्री या सेनापति या राजा होता है ( जँमिनि० ) ।

४९९--६,७,८, भाव में शुभ ग्रह हो पाप ग्रह से युक्त दुष्ट न हो तो छत्र वाला

राजा, दंड करने वाला, दीर्घायु, निर्भय, निरोग बहुत स्त्रियों का पति होता है (शंभु) ।

५००--ल्ग्न से अष्टम और व्यय में क्रूर ग्रह हो और बीच में. शुभ अशुभ ग्रह

हों तो वह राजयोग है महाराजा हो ( मान० ) ।

४० वर्ष जीता है राजयोग है (ल. चं.) ।

५०१--८,१२ भाव में कूर ग्रह हो दशम में एक क्रूर ग्रह एक शुभ ग्रह हों तो महाराजा हो (जा. स.) ।

५०२--पाप ग्रह ६,१० भाव में, शुभ प्रह ९,११ भाव में हो तो राजा हो (जा. पा.) ।

५०३--नवम भाव में सब शुभ ग्रह हों तो राज्यदाता हैं (जा. सं.) । ` ५०४-नवम में सब शुभ ग्रह हों शुभ ग्रह से दृष्ट हों तो शत्रुओं को जीतने वाला राजा हो ।

५०५--नवम भाव में बुध को छोड़कर ६,७ ग्रह हों तो राजा हो (जा. सं.) । _ ५०६--दशम स्थान में शुभ ग्रह स्वराशि में हो ओर शुभ दृष्ट हो तो अपने कुल में राजा या श्रेष्ठ अति उदार हो (शंभु) । ल , २०७--लाभ में ३ सौम्य ग्रह हों तो बड़ा राजा हो ३ पाप ग्रह हों तो दुःखी, दरिद्री शोक युक्त हो ।

,५०८--दशम और लाभ में शुभ ग्रह हो पाप ग्रह की राशि में चन्द्र हो तो राज- योग होता (जा. सं.) । ५०९--उपचय में सब. शुभ ग्रह हों पाप ग्रह लग्न या दशम में हों तो सम्पूर्ण शत्रू ओं को जीतने वाला क्रूर स्वभाव का राजा हो (जा. पारि.) । छ

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