सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंराजयोग: ३८९
२२--सब पाप ग्रह केन्द्र में हों नीच या शत्रु के घर के हों और सोम्य ग्रहों की उन पर दृष्टि न हो शुभ ग्रह ६,८,१२ भाव में हों तो राजयोग नष्ट हो (जा० भ०) । २३--इसी प्रकार नीच शत्रु राशि आर पाप षष्ठ्यंश वाले ग्रह राजयोग नष्ट करते हैं ( जा० पारि० )।
२४--९,१०,११ स्थानों के स्वामी नीच के हों तो सव राजयोग नष्ट हों ।
२५--उच्च के ग्रह नीचांशक में हों तो राजयोग नष्ट हो ।
२६--सब पाप ग्रह नीच के केन्द्र में हों ।
२७--सब पाप ग्रह ३,६,११ स्थानों में हों ।
२८--सौम्य ग्रह ६;८,१२ घरों में हों ।
२९--सोम्य ग्रह अस्तंगत हों या केन्द्र में न हों तो राजयोग नष्ट हो । ३०--घरों केन्द्रों में शुभ ग्रह न हों या केन्द्र में जो गृह हों वे अस्त व नीच में हों या शत्रु गृही हों ( जा० भ० ) । ३१--चारों केन्द्र शून्य हों शुभ गृह अस्त हों या नीच में हों या ४ गृह शत्रु क्षेत्री हों तो राज योग भंग हो ( जा० सं० ) ।
३२--चारों केन्द्रों में पाप ग्रह हों और द्वितीय में भी पाप ग्रह हों तो वह अति दरिद्री वंश वाले को भय प्रद है ( जा० सं० ) । ३३--राजयोग कारक ग्रह नीच शत्रुक्षेत्री या अस्त हो.या नीच या शत्रुक्षेत्री ग्रह से दृष्ट हो तो राजयोग भंग हो ( जा० पारि० ) ;
३४--दशम भाव में नीच का ग्रह हो तो राजयोग भंग हो ।
३५--शत्रु राशि में सब ग्रह हों चाहे नवांश में या वर्गोत्तम में हों तो राजयोग
नष्ट हो ( शंभु० ) ।
३६--वहुत ग्रह नीच में हों तो राजयोग नष्ट हो ( शंभु० ) । ३७--लग्न में एक भी ग्रह नीच का हो ओर दशम में पाप ग्रह हो तो राजयोग
नष्ट हो ।
३८--यदि ४,५ या ६ ग्रह एक स्थान में हों तो राजयोग नष्ट हो पर भिक्षुक हो।
३९--जितने राजयोग नाशक योग हैं, जितने रेका (दरिद्र) योग हैं, जितने प्रेष्य
( दूसरे की नौकरी ) योग और केमद्रुम योग हैं ये चारों प्रकार के योग शुभ नाशक हैं
{ जा० पारि० ) ।
४०--जन्म में उल्कापात हो या व्यतीपात योग हो या धरती कम्पायमोन हो, फट जावे या जन्म समय पूछल तारा का उदय हो तो राजयोग में भी उत्पन्न हुआ
दरिद्री होता है ( शंभु० ) 1