भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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३८८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

३--गुरु अस्त हो और ३ ग्रह नीच के हो, और जन्म लग्न कुंभ हो तो राजयोग

नष्ट हो ( जा० भ० ) ||

४--गुरु अस्त हो, एक भी ग्रह उच्च में न हो, दशम में पाप ग्रह हो तो राजयोग

नष्ट हो ( शंभु० ) ।

५-- लर्न में मकर का गुरु परम नीचगत हो तो राजयोग में भी उत्पन्न दरिद्री हो ( शंभू. ) । शुक्र का

६--शुक्र नीच या सिंह के नवांश में हो तो राजयोग नष्ट हो।

७--शुक्र परम नीच अंश में हो तो राजयोग: नष्ट होकर पतन हो (जा०भ० )r

८--शुक्र अस्त हो, या नीचगत हो, सब ग्रह केन्द्र में हों और शुभ ग्रह ६,८१२

भाव में हों तो सब राजयोग भंग हों ( शंभु० ) ।

९--शुक्र नीच का होने से राजयोग नष्ट होता है ( स$ चि० ) ।

चन्द्र का

१०--चन्द्र अस्त हो ४ ग्रह नीच या शत्रु क्षत्री हों, केन्द्र ग्रह शून्य हो या उसमें

शुभ ग्रह न हों तो राजयोग नष्ट हो ( जा० सं० )।

११-चन्द्रमा परम नीच अंश का हो या चन्द्र परम -नीच हो तो राजयोग

नष्ट हो ।

१२--चन्द्रमा तुला के १० अंश पर हो तो हजारों योगों को भंग करता है।

१३--नीच का हो तो भाग्य नष्ट करता है।

१४--चन्द्रमा या लग्न को एक भी ग्रह न देखे तो राजयोग नष्ट हो (शंभु०) ४

१५--क्षीण चन्द्र को पाप ग्रह देखते हों और शुभ ग्रह नहीं देखते हों और सूर्य

स्व नवांश में हो तो पहिले राज्य प्राप्त हो पश्चात्‌ राजयोग नष्ट होकर दुःखी हो,

आशा नष्ट हो ( जा भ०-)।

१६--बलहीन चन्द्र चरराशि के अन्त भाग में, स्थिर राशि के आदि में, दविस्थभाव

राशि के मध्य में हो और कोई भी ग्रह लग्न में न हो तो राजयोग भंग हो (जा. पारि.)

इतर ग्रहों के योग

१७--मंगल सूर्यं शनि ३,६,११ स्थानों में हों, शुभः ग्रह केन्द्र में न हो या अस्तंगत

हो, या शुभ ग्रह सप्तम हो राहु लर्न में हो चन्द्र की दृष्टि उस राहु पर हो राजयोग

नष्ट हो ( जा० भ० )1 ;

मतांतर--सूर्यं मंगल शनि १,६,११ भाव में हों शेष पूर्वोक्तं ।

१८-¬सूर्यं उच्च का नीच नवांश में हो तो राजयोग नष्ट हो । इस योग में पाप

दुष्ट सूर्य लग्न में हो तो निश्चय राजभंग हो ( स० चि० ) ।

१९--सूये परम नीच का हो तो हजार राजयोग नष्ट हों ( स० चि० )। -

२०--छनम में राहु हो चन्द्र से दुष्ट हो तो राजयोग भंग हो ।

२१-५ ग्रह नीच के हों या अस्त हों तो राजयोग भंग हो ।