भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अध्याय १२

नाभस आदि योग

योग--जन्म कुंडली में जो ग्रह हैं उनका अधिकार एक-एक दूसरे ग्रह से दृष्टि

आदि द्वारा सम्बन्ध एवं ग्रहों की स्थिति के अनुसार ग्रहों का जो विशेष योग बनता हैः

यहाँ उनके नाम दिये हैं ओर उनका फल बताया है। नाभस आदि अनेक इस प्रकार

के योग आगे दिये हैं ।

थोग के फल का समय

इन योगों का फल उस ग्रह की दशा में होता है । दशा आरम्भ काल में ग्रह स्पष्ट

के अनुसार यवनाचार्य ने ऐसे १५०० भेद कहे हैं कोई आचार्य पृथक असंख्य भेद

बतलाते हैं ।

१ आकृति योग के २० भेद

१. गदायोग--केन्द्र के पास मिले किसी दो भाव में सव ग्रह हों तो गदायोग

होता है । इसक्रे ४ भेद हैं ।

(१) लग्न और चतुर्थं में सब ग्रह, (२) चतुर्थं और सप्तम में सव ग्रह, (३)सप्तम

और दशम में सब ग्रह, (४) दशम और लग्न में सब ग्रह । यवनमत से इन चारों भेदो

के पृथक-पुथक नाम भी दिये हैं ।

(१) लग्न और चतुर्थ में सब ग्रह-गदा । (२) चतुर्थ और सप्तम में सव ग्रह-शंखः

(३) सप्तम और दशम में सब ग्रह-बच्चुक । (४) दशम और लग्न में सब ग्रह=ध्वज ।