सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 411, कुल 454 में से
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नामस आदि योग : ४०१
जवानी में धमं काम अर्थ सम्पत्ति सहित, नम्रता सहित, सदा उत्साही, श्रेष्ट बत्ति वाला शांत चित्त क्रोध रहित [जा० भ०] । दाता, स्थिर चित्त, प्रतापी, नियमों से यक्त, मध्य अवस्था में सुख, और पुत्रों से युवत [ल० च॑०]। योग में वृत नियम सुकमं में तत्पर, मध्यावस्था में सुखी, धन पुत्र से युक्त, दाता, स्थिर बुद्धि [वृ० पा०] । ८. पद्य [कमल]-सवंत्र निदित, कीति और अगणित सुख, ग् ण, विद्या एवं पराक्रम वाला ( वृ० जा० ) । सदा बड़े हर्ष वाला, बलवान्, सुन्दर कांति, यशवान, राजा के वंश में उत्पन्न बड़ी आयु वाला ( जा० ० )। स्थिर आयु वाला, बड़ी कीति युक्त, मनोहर शुभ पुत्रों से युक्त, गुण और मद से भी युक्त ( छ० च० ) । धनी, गुणी, दीर्घायु, विख्यात यश, शुद्ध, सैकड़ों सु कमं करने वाला राजा ( वृ० पा० )।
९. वापी--वहुत काल तक थोड़े सुख वाला, भूमि में घन गाड़ने वाला, कृपण ( वृ० जा० ) । बड़ी आयु, अपने वंश में प्रतापी, सौख्य युक्त, अत्यन्त धीर, पंडित, सुन्दर वाणो, श्रेष्ठ मन, फूलों की वाटिका करने वाला, थोड़ा सुख ( जा० भ० ) धन संग्रह में चतुर, स्थिर धन, स्थिर सुख, पुत्रवान्, नृत्य नाटक आदि से सुखी राजा होता है ( वृ० पा० ) । बहुत काल तक थोड़ा सुख वाला, धन बढ़ाने वाला, कृपण ( जा० पारि० ) ।
१०. यूप--दानी, प्रमाद न करने वाळा, उत्तम यज्ञ करने वाला ( वु० जा० } धैर्यवान् उदार, यज्ञ कमं में तत्पर, अनेक विद्या और श्रेष्ठ विचार करने वाला लक्ष्मी युक्त ( जा० भ० ) आत्म रक्षा में रत; त्यागी, सुखी, सत्य और कृतों से युक्त विशिष्ट ओर मंत्रवादी ( छ० च० ) आत्मज्ञानी, यज्ञ कर्ता, स्त्री से सुखी, बलवान्, ब्रत नियम
को पालन करने वाला, विशिष्ट पुरुष होला है ( वृ० पा० ) ।
११. शर (वाण)--जीव घाती, कंद खाने का मालिक, बाण, बन्दूक, गोली आदि
का बनाने वाला ( वृ० जा० )। अति हिंसा करने वाला, शिल्प का जानने वाला,
दुःखों से सन्ताप को प्राप्त, शिल्प के कार्य से दुःखी ( जा. भ, ) वाणों का वमाने'
वाळा, चोरों की सेवा करने वाळा, माँस खाने वाळा, मृगों को वाँधने वाला, हिंसक,
कारीगरियों को जानने वाला (ल॑. चं.) । शर बनाने वाला, जेल का मालिक, शिकार
से धन वाला, मांस भक्षी, हिंसक, कुशिल्पकार ( वृ. पा. ) ।
१२. शक्ति--नीच कमं करने वाला आलसी, योग और धन से वर्जित (व्. जा.) ।
नीच ॐच मनुष्यों से प्रीति करने वाला, आलसी, सौख्य और धन से रहित, बिवाद
और युद्ध में उसकी विशाल बुद्धि का सौख्य थोड़ा होता है ( जा. भ: ) । अति आयु
वाला, युद्ध में निपुण, सौभाग्यवान्, नीच, दुःखी दरिद्री ( ल. चं. )। घन हीन, निष्फल जीवन, दुःखी, नीच, आलसी दीर्घायु, युद्ध में निपुण, सुन्दर रूप ( वृ. पा. ) ।
१३. दंड--पुत्रादि से रहित, दास कमं करने वाला (वृ. जा.) | दीन हीन उन्मत्तों
से मित्रता को प्राप्त हुए सुख वाला, सेवकों से बेर करने वाला, अपने कुटुम्वियो से
बैर करने वाला, स्त्रो, पुत्र, धन, मित्रों से हीन, बुद्धि रहित (जा. भ.) । दरिद्री, नष्ट
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