भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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नाभस आदि योग : ४११

१२-केन्ध में चन्द्र हो या अन्य कोई ग्रह हो तो के० द्रु० योग भंग हो जाता है ( जा० पारि० ) |

१३--डृग्न या चन्द्र से ३,६,१०,११ घर में कोई शुभ ग्रह न हो तो दरिद्र हो जाता है । इससे ३,६,१०,११ में शुभ ग्रह हो तो यह योग भंग हो जाता है (जा० पा०) १४--सब ग्रह ५ घरों में कोई भी क्रक से हों चाहे वे पाप या शुभ ग्रह के साथ हों या नीच या शत्रु गृही भी हों तो अच्छा फल देंगे बुरा प्रभाव दूर कर केमद्रुम योग भंग कर भाग्यवान्‌ बना देंगे ( ज्यो० रह० )1 चंद्र कृत योगों का फल

१ अधियोग - सेनापति मंत्री या राजा हो। इसमें भी विचार है कि योग कर्ता ग्रह उत्तम वली हो तो राजा, मध्यबली हो तो मंत्री, हीन बली हो. तो सेनापति हो ओर सौख्य ऐश्वर्य युक्त हो, शत्रु नष्ट हो, दीर्घायु निरोग और निर्भय हो (वृ० जा० 91 सुख विभव से सम्पन्न, शत्रु रहित, दीर्घायु, निरोग, निर्भय सेनापति मंत्री या राजा हो। चन्द्र से ६,७,८ घर में से १ घर में ग्रह हो तो सेना नायक, २ घर में ग्रह हो तो मंत्री, ३ घर में ग्रह हो तो राजा हो (स० चि० )। २ सुनफा योग--अपने बाहु वल से कमाये हुए धन युक्त, राजा या राजा के तुल्य, बुद्धिमान्‌, विख्यात कीतिवाला ( वृ० जा? ) राजमंत्री पुण्यवान्‌, विद्वान्‌, अपने वाहुवल से कमाये हुए धन से धनवान्‌, सम्पूर्ण मनुष्यों में बड़ी कीति से विख्यात, बुद्धि में अधिक निश्चय होता है ( शंभु ) । अपनी भुजाओं से मान को इतट्ठा करने वाला, बड़े यश वाला, वुद्धिमान्‌, सुखी, राजा का मंत्री, श्रेष्ठ कृत्य करने बाला ( जा० भ० )।

चन्द्र से दूसरे में मंगल--पंडित, बहुत धन वाला, कठोर वचन, हिंसक, सदा विरोध युक्त, समर्थ, राजा ।

चन्द्र से दूसरे में वुध --अतीत शास्त्र वेत्ता, चतुर, धर्मात्मा, काव्यकर्ता, शूरवीर, सवका प्रिय, सुन्दर शील । ४ चन्द्र से दुसरे में गुरु--सव विद्याओं का आचार्य, विख्यात और राजा, धर्मात्मा, कुदुम्व और धन की वृद्धि ।

चन्द्र से दुसरे में शुक्र--स्त्री, क्षेत्र और गृह इनका स्वामी अर्थात्‌ स्त्री, धन जगह जमीन घर वाळा, चौपायों से यवत, पराक्रमी राजा तथा सुन्दर कार्य कर्ता, सुन्दर वेथ, चतुर ।

चन्द्र से दूसरे में शनि--चतुर वुद्धि, ग्राम और पुर से पूजित, धनी, गुप्त रीति से काम करने वाळा, मलिन ।

३--अनफा--जिसकी आज्ञा को कोई भंग न करे, निरोगी, विनयान्‌, गुणवान्‌, ख्याति कीति, शब्द स्पशं रूप रस गंध का सुख भोगने वाला, सुन्दर, शरीर, मानसी दुःखों से रहित ( बु० जा० ) उदार मूर्ति गुणवान्‌, यशवान्‌, काम कला पुक्त, श्रेष्ठ दाणी, श्रेष्ठ बृत्ति, निरन्तर नम्रता सहित, स्वामी होता है (जा० भ०) राजा निरोग,