सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 422, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें४१२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
सब सुखों से युक्त, सुशील, यशस्वी, सुंझ्प ( वु० पा० ) ।
चन्द्र से १२वें मंगल--चोरों का स्वामी, दर्शन योग्य, इन्द्रियजित्, मानी, संग्राम
में उत्साही, क्रोध से सम्पदाओं को सिद्ध करने वाळा, सुन्दर शरीर प्रगल्भ ।
चन्द्र से १२ वें बुध--गान विद्या में चतुर, चित्रकारी में चतुर, पडित, अतिवक्ता,
राजा से सत्कार प्राप्त, मनोहर, सुन्दर ऐश्वर्य युक्त, विख्यात कमो वाला ।
चन्द्र से १२वें गुरु--गम्भीर, श्रेष्ठ बुद्धि, पुत्रों से युक्त, बुद्धिमान्, राजा के वश
में चलने वाला, समर्थ विद्वान् ।
चन्द्र से १२वें शुक्र--ित्रयों को अतिप्रिय, राजा का स्नेही, रक्षक, मनोहर सुवर्ण
आदि धन से सम्पन्न ।
चन्द्र से १२वें शनि--आधीन जनों का पोषण कर्ता, जनपति, आज्ञाकारी चौपायों
से युक्त, दुवंलता युक्त, भोगी, गुणी पुत्रवान् ।
४_दुरुधरा-यथासम्भव भोग भोगने में सुखी, धन तथा घोड़ा आदि वाहनों से
युक्त, दाता, अच्छे चाकर ( वु ० जा० )। उत्पन्न हुए भोगों को भोगने में सुखी, धन
चाहन आदि युक्त, दानी अच्छे नौकर ( मान० ) । प्राप्त सुख को भोगने वाला, दानी,
धन वाहन युक्त उत्तम नौकर ( व्» पा ) ।
चन्द्र यदि मंगल ओर वुध के बीच हो--मरण पर्यन्त बहुत-सा धन वाळा, अति
चतुर, अतीव टेढ अंतःकरण वाला, गुणी, लोभी, वृद्ध स्त्री से आशक्त, कुरू में मुख्य !
चन्द्र यदि मंगळ-गुरु के बीच हो--स्वकमों में सर्वत्र विख्यात, कपटी, अनेक के
किये वेर युक्त, क्रोधी, वैर युक्त डीठ, रक्षा करने में तत्पर, संग्रह करने वाळा ।
चन्द्र यदि मंगल और शुक्र के बीच हो--उत्तम स्त्री वाळा, अति सुन्दर, प्रत्येक
कार्य में खेद करने वाला, अस्त्रों का वेत्ता, शूरवीर कसरती, युद्ध में उत्साहपूर्वक
लड्ने वाला |
चन्द्र यदि मंगल-शनि के बीच हो उत्तम जनों से प्रीत करने वाला, बहुत घन
संचय करने बाला, अनेक व्यसनों में आसक्त, क्रोधी, चुगल, शत्रु से युवत । _ चन्द्र यदि वुध-गुरु के बीच हो धर्मात्मा, शास्त्रवेत्ता, वादय चतुर, समस्त दृद्धियों अ समृद्ध, त्यागी, दान देने मे विख्यात । चन्द्र यदि वुध-शुक्र के वीच हो--प्रिय भाषी, सर्वप्रिय, प्रवृत्ति मार्ग में प्रवृत्ति, सुकृत करने वाळा, सुख से पर्ण, बड़ा शूर, मंत्र में चतुर, राज्य करने वाला!
चन्द्र यदि बुध शनि के बीच हो- अनेक देशों में गमन करने चाला, घन के बश में न रहने वाळा, सर्वोत्तम विद्यां का ज्ञाता, अन्य जन पुज्य, स्वजनों का विरोधी ।
चन्द्र यदि ग् रु-शुक्गः के बीच हो--धैर्ये तथा बुद्धि का धारण करते वाला, स्थिरता युक्त नीतिज्ञ, सुवर्ण रत्नों से परिपूर्ण जगत् में विख्यात, राज बस्यो का करने वाळा । चन्द्र यदि ग.स-शनि के वीच हो--सुख, नीति और विज्ञान से युक्त, प्रिथ वचत व्कहूने वाळा, विद्वान, प्रत्येक कार्य भें भार उठाने वाळा, सुङ्प, पुत्रवान्, धनबाद् । चन्द्र यदि शुक्र-शनि के वीच हो--आयु में वढी फऱ्या टे विवाह, कुलाचार से