सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४२४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
राशि में हो, छग्नेश शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो अन्नदान में रत, भोगवान्, स्थूल काय, ३३ वर्ष अनंतर शभ फल हो ।
८१-कऊन्तुक योग-दशमेश नवम में, धनेश लग्न में, द्वितीय और दशम पर शुभ अह की दृष्टि हो तो--चातुर्य युक्त वाणी, शत्रु नाश कर्ता, दान, धर्म, धन युक्त समर्थ
१०० वर्षे आयु । ८२-चन्द्रिका योग-मंगल पञ्चम स्थान में, भाग्येश स्थित राशि का स्वामी
भाग्य स्थान से पंचम हो तो अनेक स्त्रियों से रमण कर्ता, स्त्री संतति पुत्र शोक से
दुःख अनुभावक, सम वय में सुख का अनुशीलन होता है ।
८३ रसातल योग-व्ययेश परमोच्च भाग में हो शुक्र चतुर्थेश से दृष्ट होकर व्यय
स्थान में हो तो भूमि धन का रक्षणकर्ता राजा हो ।
८४-युग्म योग-चतुर्थेश नवम में शुभ ग्रहों स युक्त हो गुरु से दृष्ट हो तो जीवनभर सुखी रहे राजलक्ष्मी युक्त रहे ।
८५. अंगुल योग--पञ्चमेश स्थित अंश राशि का स्वामी उच्च स्थान में बुध
और दशमेश युक्त हो तो वस्त्र आभरण सहित गौ भूमि धन युक्त मध्यायु हो ।
८६. भव्य योग--दशम में चन्द्र हो, चन्द्र स्थित अंश राशि का स्वामी उच्च
स्थान में भाग्येश, धनेश से युक्त हो तो धन ऐश्वर्य संयुक्त, प्राज्ञ सुगुणवानू विद्या
निपुण हो । ८७. योगि योग--भाग्येश त्र्यंश में राज्येश हो, राज स्थान में गुरु हो तो सुखदाता, राज सभा में माननीय, स्त्रियों को प्रिय ४२ वर्ष से अधिक आयु । ८५८. गारुड़ योग--चन्द्र स्थित अंश राशि का स्वामी उच्च में हो शुक्ल पल में दिन का जन्म हो तो सज्जन पूजित, मृदुभाषी, शत्रु नाश कर्ता, वल्वान् ३४ वर्ष में विषय युक्त हो ता है ।
८९. देव योग--लग्तेश के त्र्यंश में भाग्येश हो और इतके नतांश का स्वामी भो साथ हो और जन्म दिन का हो तो ऐश्वर्यवान्, कोति युक्त; सुबुद्धि बलवान् हो ३२ वर्ष के पश्चात् फल हो ।
९०. धर्मे योग--गुरु शुक्र नवम भाव में लाभेश युवत हों धनेश से दृष्ट हो तो सेनापति, धनवान्, युद्धाभिलाषी, दाता, धार्मिक होता है । ९१. क्रोध योग-पञ्चमेश राहु युक्त हो मंगल से दृष्ट हो, लाभेश के अंश में हो ती पाप कमे, धन आगम, दान परायण, साहसिक घरोध दपं, भयान्वित होता है । ९२, अंग योग-केन्द्र त्रिकोण के स्वाभियों का त्रिशांशेश शुभ ग्रह हो तो-जोवन अर सुखी 'रहे । ओ त्रिशाशेश-मंगल हो तो-क्रोधी, शनि-क्रर स्वभाव । गुरु-पुराण फलश्वोता । बुध-जञानवान् । शुक्रःत्यागी ।
९३. मारत योग-राहु ३,६ या ११ भाव में हो और लग्न शुभ ग्रह से दृष्ट हो- तो इसमें भावोकत पाप फल नहीं होता । न 7