भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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नाभस आदि योग : ४२३

६७-नालीक योग-पंचमेश नवम में, चन्द्र छाभेश से युक्‍त धन में हो तो राजा- धिराज, राज मान्य, षोड़श विद्या दान कर्ता, ५० वर्ष से अधिक जीवे । ६८-भद्र योग-गुरु चन्द्र दशम में हों, धनेश लाभ में हो और लग्नेश शुभ गूहों से युक्त हो तो मानस ज्ञान और सब कार्य में समर्थ, धनवान्‌ हो 1

६९-नुप योग लग्नेश स्थित अश राशि का स्वामी, चन्द्र स्थित राशि युक्त हो राजयोग से दृष्ट हो तो आलोचन शक्ति युक्त मंडळाधिपति, धेयंवान्‌, सैन्याधिपति ' प्रसिद्ध तथा सुखी होता है ।

७०-धूम्र योग--मंगल स्थित अंश राशि का स्वामी त्रिकोण में शुक्र गुरु हो, ` दशभ में उच्च का शनि हो तो सुखी, सुख दाता, धैर्य गुण सम्पन्न, धनवान्‌ राज पूज्य हो ।

७१-मृतयोग-अष्टमेश स्थित अंश राशि का स्वामी शुभ स्थान में शुभ ग्रह युक्त

हो, नवमेश उच्च स्थान में हो तो कर्ण समान दाता, धर्मात्मा, धनवान्‌, बलवान्‌ हो

यह १९ वर्ष तक जीता है।

७२-गन्धर्वं योग-सप्तम से त्रिकोण में दशमेश हो, बली सूर्य उच्च में हो नवम

स्थान में चन्द्र हो, लग्नेश गुरु युक्त हो तो गन्धर्व विद्या, नंपुण्य, बलवान्‌, कीतिमान्‌,

भोगी हो ६५ वषं तक जीता है!

७३-चण्ड योग-लग्न में उच्च का ग्रह हो वह मंगल से दुष्ट हो और नवमेश

तृतीय स्थान में हों तो सेनाधिपति, वाहनाध्यक्ष, बलवान्‌ ६० वषं तक जीवित रहे।

७४-नागेन्द्र योग-भाग्येश गुरु से दृष्ट होकर सप्तमेश स्थित राशि से नवम

राशि पर हो तो सुन्दर विद्वान्‌ ६ वर्ष बाद यावत्‌ जीवन सुखी रहे।

७५-मुकुट योग-नवमेश स्थित राशि से नवम स्थान में गुरु हो गुरु से नवम

स्थान पर शुभ ग्रह हो, दशम में शनि हो तो दुर्गाधीश, राजा कोल भिल्ल का स्वामी

दुर्मार्गी हो ।

७६-चित्र योग-धनेश नवम स्थान में, नवमेश लाभ में, लाभेश परमोच्च में हो

तो बुद्धिमान्‌, शास्त्र निपुण, कुशील हो, राजवंशज हो तो राजा हो ।

७७-वृष्टि योग-क्र्मं भावांश पति की मध्य स्थिति, चन्द्र उच्च स्थान में हो ।

जन्म रात्रि समय हो, लग्न में चर राशि हो तो व्यापारी, धनवान्‌, समर्थ २७ वर्ष के

बाद सुखी हो ।

७८-चन्द्रिका योग-षष्ठेश सहित नवमेश भाग्येश के अंश में सूर्यं से युक्त हो,

लग्न स्थिर हो षष्ठेश से दुष्ट हो तो शोर्यवान्‌, दाता, धनाध्यक्ष, कीतिमान्‌, मंत्री

१०० वर्ष तक आयु ।

9९-भूप योग-राहु स्थित अंश राशि का जो स्वामी हो उसके त्रिकोण स्थान में

उसका स्वामी हो इस पर मंगल की दृष्टि हो तो--शत्रु नाश कर्ता, सेनाधिपति,

राजेश्वर हो ३४ वर्ष के अनंतर राज्य भार वाही हो ।

८०-नासीर योग-ळग्नेश और गुरु चतुर्थ स्थान में, चन्द्र सप्तमेश के साथ एक