सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 437, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंनाभस आदि योग : ४२७
वान्, उन्नतशील और राजाओं में श्रेष्ठ, सबसे पूजित हो (फल०) । ११४. श्रीकंठ्योग-लग्नेश सूर्यं और चन्द्र केन्द्र वौर त्रिकोण में होकर उच्च स्वगृही या मित्र गृही हो तो रुद्राक्ष माळा से सुशोभित विभूति शरीर में लेपन करे महात्मा, सदा शिव की अराधना करने वाला, सदा सुनियम पालन करने वाळा, शिव व्रत में दीक्षित, साधुजनों का उपकार करने वाला, दूसरों के घर्म या विश्वास पर द्वेष भाव से रहित, बलवान् हो ।
११५. श्रीनाथ योग-शुक्र नवमेश हो, बुध केन्द्र या त्रिकोण में उच्च का स्वगृही
या मित्र गृही हो तो घनी, सरल वाक्य, चतुर, निपुण, शरीर में नारायण का चिह्न
शंख चक्र आदि चिह्नित, सदा गुणी, ईश्वर का नाम जिसमें हो ऐसे सुन्दर पद्य कहने
वाला, ईश्वर का पूजक, अच्छी स्त्री पुत्र युक्त, सबको प्रिय अति सुभग ।
अन्य-दशमेश दशम में स्वोच्च का हो या दशमेश नवमेश युक्त हो ।
फल- इन्द्र के समान राजा (वृ० पा०) ।
११६. विरिञ्च योग-यदि गुरु पञ्चमेश ओर शनि केन्द्र और त्रिकोण में होकर
उच्च स्वगृही या मित्र गृही हो ब्रह्म ज्ञान पराया, अतिशय बुद्धिमान्, दूसरे पवित्र
लेखों के अतिरिक्त वेदों का प्राधान्य देने वाला अर्थात् वैदिक मागं पर चलने वाला,
सब अच्छे गुणों से भूषित, सदा प्रसन्न, प्रख्यात, बहुत शिष्य हों, भाषण में सीम्य,
बहुत धन स्त्री और संतान युक्त ब्रह्म तेज से प्रकाशवान्, राजाओं से वंदित दीर्घायु
जितेन्द्रिय हो ।
११७. कुल पांस योग-(दरिद्र योग) केन्द्र में शुभाशुभ ग्रह हों, लग्नेश पर चन्द्र
की दृष्टि न हो या शुभ ग्रह पचमांशक में हों तो कुल को मरिन करता है विदेश
वासी, अपने घर से भ्रष्ट, पुत्र स्त्री रहित, दोषों के समूह से पीडित हो ।
११८. मालिका योग-लग्न से लगातार ५ घर में ५ ग्रह हों ।
षड् ग्रह योग-लग्न से लगातार ६ घर में ६ ग्रह हों ।। तो राजयोग होता है ।
सप्त ग्रह योग-लम्न से लगातार ७ घर में ७ ग्रह हों ( विना कोई शंकाके लाभ
अष्ट ग्रह योग-लग्न से लगातार ८ घर में ८ ग्रह हों | होता है ।
नव ग्रह योग-लग्न से लगातार ९ घर में ९ ग्रह हों |
११९. मालिकायोग -अन्यमत--किसी भी भाव से ७ भावों में ७ ग्रह हो तो उस
भाव सम्बन्धी मालिका योग होता है। यनि लग्न से लगातार ७ घर में ७ ग्रह हों तो
लग्न मालिका योग होगा । लग्न मालिका का फल-राजा अनेक हाथी घोड़े का स्वामी
घन आदि ७ भावों में हो तो-धनवान् पिता की भक्ति ओर गुणवान् मनुष्यों में
चक्रवर्ती हो ।
विक्रम मालिका-पराक्रमी राजा धनी और रोगी 1
सुखादि मालिका-बहुत देशों में भाग्यवान् बड़ादानी, राजा ।
पुत्रादि मालिका--यज्ञ करने वाला राजा वा कीतिमान् ।
षष्ट गृह मालिका--कभी धन सुख प्राप्त हो कभी दरिद्र हो ।