सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 445, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंनाथस आदि योग : ४३५
गुणी राजा, सुखी और धार्मिक हो ।
पंच महापुरुष योग—
सूर्य और चन्द्र को छोड़कर शेष ५ ग्रह स्वगृही या उच्च होकर केन्द्र में पड़ तो ५ प्रकार के पञ्च महापुरुष योग होते हैं । यदि सूर्य या चन्द्र के साथ ये योग पड़ें तो फल घट जाता है । अर्थात् सूर्य चन्द्रमा सहित मंगल आदि कोई ग्रह उक्त प्रकार से हो तो राजा नहीं करते केवल अपनी दशा में शुभ फल देते हैं ।
कुछ का मत है कि लम्ब से केन्द्र का इन योगों में विचार होता है चन्द्रमा से भी केन्द्र में इन योगों का विचार करना ।
(१) रुचक योग—मंगल स्वगृही या उच्च का होकर केन्द्र में हो ।
(२) भद्र योग—बुध स्वगृही या उच्च का होकर केन्द्र में हो ।
(३) हंस योग—गुरु स्वगृही या उच्च का होकर केन्द्र में हो ।