सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४३६ : सच्चिद्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
(४) मालेय—शुक्र स्वगृही या उच्च का होकर केन्द्र में हो ।
(५) शासक योग—शनि स्वगृही या उच्च का होकर केन्द्र में हो ।
अथ मत्त से स्वगृही, उच्च के अतिरिक्त मूल त्रिकोण का भी विचार करना ।
पाँचों योगों का फल संक्षिप्त में
जिसके १, २, ३, ४ या पाँचों योग हों उसका फल ।
(१) जिसके उपरोक्त १ ही योग हो—माध्यवान् हो । (२) इनमें २ योग हों तो—राजा तुल्य हो । (३) तीन योग हों तो—राजा हो । (४) चार योग हों तो—राजेश्वर हो । (५) जिसके पाँचों उपरोक्त योग हों तो राजेश्वर से भी श्रेष्ठ हो ।
पंचमहापुरुष योग का फल
(१) रुचक योग—मुँह लम्बा, परम उत्साही, निर्मल कांति, वलवान्, सुन्दर भ्रुकुटी कृष्ण केश, सब वस्तुओं में रुचि, संग्राम प्रिय, रक्तश्याम वर्ण, शत्रु को जीतने वाला, विवेकी, चोरों का पोषक (सरदार) क्रूर स्वभाव, दुर्बल जंघा, ब्राह्मणों का भक्त, हाथ में वीणा, वज्र. धनुष, पाश, वृष चिह्न और चक्र रेखा से युक्त, युक्त विचार तथा अभिचार (मारण मोहन आदि) में चतुर, लम्बाई में १०० अंगुल मुख की लम्बाई में, तुल्य कटि प्रदेश वाला, तौल में एक हजार तुला तुल्य, विन्ध्य और सन्नांचल प्रदेश का शासक होकर ७० वर्ष की आयु, शस्त्र या अग्नि के आघात से स्वर्ग जाता है । (वृ० पा०) । दीर्घायु, स्वच्छ कांति, सधिर और बल से पूर्ण, साहसी, प्रत्येक कार्य में सफलता उत्तम भ्रुकुटी, नील केश, सम हाथ, पैर, मंत्रश्र, कीर्ति पवित्र, अरुणता युक्त श्याम वर्ण, शूरवीर शत्रुनाशक, शंख समान कंठ, बड़ा पराक्रमी, क्रूर स्नेही, ब्राह्मण गुरु से विनय युक्त घुटना पिडली जंघा से दुबला, जिसके हाथ पैर में खटवांग, पाश, वृष, धनुष, शर, चक्र, वीणा विद्या इनके चिह्न होते हैं, सीधी अंगुली वाला, सलाह लेने में कुशल, अकेला ही हजारों के तुल्य, मध्यम कटि, सह्य, विन्ध्य पर्वत उज्जयनी देश का राजा, आयु ७० वर्ष के लगभग शस्त्र और अग्नि से चिह्नित, देव मंदिर के समीप देह त्याग करने वाला (मान०) ।
(२) शत्रु योग—सिंह समान प्रतिभावान्, उच्च वक्षःस्थल, हाथी सदृश गमन, स्थूल