भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 447, कुल 454 में से

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नाभस अदि योग: ४३७

और लम्बी भुजा, पंडित, चतुरस्त्र योग क्रिया जानते वाळा, सत्य गुणी, सुन्दर पर,

सुन्दर दाड़ी मूछ, भोगी, शंख, चक्र, गदा शर हाथी ध्वजा हल, इन रेखाओं से चिह्नित

हाथ ओर पेर वाला सुन्दर नासिका, शास्त्र ज्ञाता, काले ओर घुंघराले केश, सब कार्यों

में स्वतंत्र, अपने परिवार को पालने वाला, मित्रादि जन भी उसके धन का उपयोग

करते हूँ । वह तौल में पूर्ण और २० तुला होता है । स्त्री पुत्रादि से युक्त सकुशल,

वह मध्यदेश का पालक होकर १०० वषं जीता है (वृ० पा०)।

तौल का अनुमान-वतंमान रुपया-१ क्षं । ४ कर्ष=१ पळ ।

३०० पल>१ तुला, २० तुला=१ भार. ।

१२०२ तोला=१ तुला (१५ सेर) (व्‌० पा०) ।

सिह समान चेहरे वाला, मत्त हाथी की चाल, पुष्ट उन्नत वक्षस्थल, सुन्दर मोटी

सुडौल भुजा, कामी, ऊँचा, कोमल, सूक्ष्म रोओं से युक्त कपोल, विद्वात्‌, कमल से

कोमल हाथ पैर, सत्वाधिक्य युक्त, योग मार्ग का ज्ञाता हाथ पैर में शंख, खड्ग, हस्ती

गदा, पुष्प वाण ध्वजा चक्र कमल हल आदि के चिह्न यात्रा मागं में मत्त हाथियों के

जल से भूमि गीली करने वाला, उत्तम केशर के समान गंध युक्त अङ्ग बाला, मनोहर

शब्द युक्त, उत्तम दोनों भौंह, अति बुद्धिमान्‌, शास्त्र का जानने वाला मान ओर भाग्य

से युक्त जिसके रहस्य कार्य छिपे हुए हों, उत्तम जिसका पेट, धमं मार्गे में निरत,

उत्तम ललाट से युक्त, वड़ धीर, काले घुंघराले केश । काम करने में स्वतंत्र, स्वजनों

पर भी क्षमा न करने वाला और उसके विभव को दूसरे ही अथिजन भोगते हैं, प्रयत्न

से तुळा में सोने चाँदी के भार को तोलने वाळा अथवा रुपया मोहरों की गिन्ती की

तो कहे कौन तराजू से भी तौलने से वड़ी कठिनाई से आवे जिसके लाखों मन सोना

चाँदी यों ही पड़ा रहे । स्त्री पुरुषों के सुख से युक्त ८० वर्ष तककान्यकुब्ज देश का

राज्य भोगने वाला (मान०) ।

(३) हंस योग--हंस के समान शब्द, सुन्दर मुख, उन्नत नासिका, कफ प्रकृति,

मधु समान पिंगल वणं नेत्र, लाल नख, तीक्ष्ण बुद्धिः पुष्ट कपोळ, गोल मस्तक, सुन्दर

पैर वाला राजा होता है । उसके हाथ पैर में मत्स्य, अंकुश, धनुष, शंख कमळ, खटिया

सदृश रेखाओं के चिह्न होते हैं । कामी होता है स्त्रियों से तृप्ति नहीं होती, लम्बाई

में ९,६ अंगुल, जल क्रीड़ा का प्रेमी, सुख पूर्वक गङ्गा और यमुना के मध्यवर्ती देश का

पालक होकर १०० वर्ष तक जीवित रहकर वन में शरीर त्याग करता है (वृ०पा०)।

अरुण मुख, उन्नत नासिका, सुन्दर चरण, सुन्दर अङ्ग, गौरांग, पुष्ट कपाळ, रक्त

नख, हंस कैसा शब्द, श्लेष्म प्रकृति, शंख, कमळ, अंकुश, मत्स्य, माळा युग्म, खट्वांग

घट इन चिल्लो से युक्त पांव, मधुर नेत्र, गोल सिर, जलाशयों में प्रीति, अति कामी,

` स्त्रियों से कभी तृप्ति न हो ६० अंगुल ऊँची देह ६० वर्ष की आयु (मान०) ।

(४) माळव्य योग-सुन्दर ओंठ, कृश कटि, चन्द्र के समान सुन्दर कांति, शरीर

में सुगन्ध वाला, सामान्य रक्त वर्ण मझोला कद, सुन्दर और स्वच्छ दांत हाथी के

समान स्वर, घुटने तक लम्बी बाहु वाळा, मुख लम्बाई में १३ ओर विस्तार में १०

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