सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअनेक ग्रहों के एक राशि में होते का फल: ३७
यात्रा करने बारां कलाओं का जानने वाला (जा० भ०) । झूठ बोलने वाला,दुष्ट, पर स्त्री गामी ( जा० पारि० )।
(५) गुरु शुक्र शनि--नीच कुल में उत्पन्न हो तो भी विशाल कीति युक्त राजा हो, निर्मल वृत्ति वाला ( शंभु० ) । राजा हो, यशस्वी, नीच कुछ में उत्पन्न होनेपर भी शील स्वभाव से युक्त राजा होवे ( मान० ) । नीच वंश में भी हो तो भी श्रेष्ठ कीति वाला पृथ्वी का स्वामी श्रेष्ट वृत्ति वाला हो ( जा० भ० )। स्वच्छ बुद्धि, विख्यात, सुख युक्त ( जा० पारि० ) ।
(६) ३ पाप ग्रह एक घर में--सदा दुःखी, अनम्र व निन्दित ।
३ शुभ ग्रह एक घर में--सुखी हो ।
चन्द्रमा पाप युक्त हो--जातक अल्प सुखी ।
सूर्य पाप युक्त हो--पिता अल्प सुखी ।
नवम भाव में त्रिग्रह योग फल
नवम में सूर्य चन्द्र मंगल--घाव युक्त शरीर, रूखा, मरे हुए पिता वाला, भ्रात हीन, रुद्र का वेरी, हिंसक ।
नवम में सूर्य चन्द्र बुध--नपुंसक सम आचरण, सब जनों का वैरी, पराक्रमी, सत्य भाषी ।
नवम में सूर्य चन्द्र गुर---उत्तम कुलीन, वाहन, धन और सौख्य युक्त । नवम में सूर्य चन्द्र शुक्र- स्त्री के कलह से नष्ट धन सोख्यवाला, राजासामन्त, सुन्दर, यज्ञ कर्ता, प्रिय भाषी ।
नमव में सूर्य चन्द्र शनि- अत्यन्त दुष्ट, खंडित आकार, पराई ऋद्धिसे युक्त,
लोक बैरी । -
नवम में सूर्य मंगल बुध--प्रियभाषी, भुज बल युक्त, ज्ञान वृद्धि, समय-समय पर कार्ये कर्ता, निष्ठूर, पिशाच बाधा से दुःख । `
नवम में सूर्य मंगल गुरु--सदा उद्योगी, देव मित्र गण पूजने में तत्पर, सम्पन्न स्त्रियों वाळा, गुणी ।
नवम में सूर्य॑ मंगल शुक्र--कलह प्रिय, कुलीन, कन्या दूषक, कमं में चंचल, सव का वेरी ।
नवम में सूर्य मंगल शनि“ बडा साहसी, अति क्षुद्र, लोक बैरी, प्रिय, मिथ्याभाषी, क्रूर, बालपने में पिता से वजित ।
नवम में सूर्ये बुध गुरु--भाग्यवान्, धनवान्, सुन्दर ऐश्वयं, राजप्रिय, सुन्दर वेष, सम्पन्न, सुन्दर पुत्र युक्त ।
नवम में सूये बुध शुक्र प्रकाशित ओर शान्त, शत्रु पक्षसे क्षीण, राजा के समान, तथा सार वाक्य वाला ।
नवम में सूर्य शुक्र--पापी, पर स्त्री गामी, प्रवासी, अति चतुर, चाकरी वाला, कामी ।