सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअनेंक ग्रहों के एक राशि में होने का फल : ४%
सूर्य चन्द्र मंगल गुरु शुक्र जन्म से अन्धा, महादुःखी, माता पिता रहित, हाथी
से प्रीत [मान०] । जाति में अन्धा, बहुत दुःखी, माता पिता से हीन, गान में प्रसन्नः
[ छ०चं० ] । आततायी, माता पिता बंधु जनों से त्यक्त, नेत्र हीन [जा०पारि०] ।
सूर्य चन्द्र मंगल गुरु शनि-पर द्रव्य हारी, योद्धा, दूसरों को दुःख देने वाला,
वडा खल समथ, [मान०] । [ल० चं०], पराये की आशा करने वाला,, इच्छित स्त्री
के विरह से संतप्त [जा० पारि०] । हु
सुर्य चन्द्र मंगल शुक्र शनि-प्रतिष्ठा आचार, धन से रहित, पर स्त्री में रत
[मान० ] .[ ल० चं० ]। मान घन प्रभाव से हीन, मरिन, पर स्त्री रत'
[जा० पारि०] ।
सूर्य चन्द्र बुध गुरु शुक्र-राजमंत्री, धनवान्, यन्त्र विद्या मोटर मशीन आदि का
जानने वाला, दंड देने वाला, संत्र विख्यात, बड़ा यशस्वी [मान०] 1 मंत्री, धनी,
प्रताप से दूसरे को दंड देने वाला (जा० पारि०], [ल० चं०] ।
सूर्य चन्द्र बुध गुरु शनि-दूसरे का अन्न खाने वाला, उन्माद युक्त, अपने प्रिय
पुरुषों के लिये व्याकुळ, ठगिया, बड़ा उम्र, बड़ा डरपोक,पर अन्न, भोगी, उन्माद युक्त,
प्रिय तप्त, छली, उंग्र, [मान०] ओर भयानक [७० चं] । परान्न भोगी, विशेष
डरपोक, पाप करने वाला, उम्र वृत्ति [जा० पारि०] ।
सूर्य चन्द्र बुध शुक्र शनि-धन, पुत्र, सुख से हीन, मरने में उत्साह, अधिक लाभ
युक्त, पेट, शरीर लम्वा [मान०]। [ल० चं०], घन हीन, दीर्घं आकृति,पुत्र
रहित, रोगवान् [जा० पारि०] ।
सूर्य चन्द्र गुरु शुक्र शनि-इन्द्रजाल विद्या जानने वाला, प्रशस्त वाणी, चंचळ चित्त
स्त्रियों को प्रिय, बड़ा चतुर, बुद्धिमान् ( मान० ) । इन्द्रजाळ में रत, वाणी में निपुण,
चलायमान चित्त, मनुष्यों का प्यारा, बुद्धिमान्, अपने शत्रुओं से डरने वाला (छ०्चं०)।
स्त्री सहित वाचाल, इन्द्रजाल करने में चतुर, भय रहित, शत्रु युक्त (जा० पारि०)।
सूर्य मंगल बुध गुरु शुक्र-प्रसन्न चित्त, बहुत घोड़ों का स्वामी; बड़ा कामी, शोक
करने वाला, सेना का स्वामी, सुन्दर, राजा का प्रिय [ मान० ] ( छ० चं० ) । शोक
रहित, सेना और घोड़ों का स्वामी, अन्य स्त्री में चंचल ( जा० पारि० ) ।
सूर्य मंगल बुध गुरु शनि-भिक्षान्न भोगी, सदा रोगी, नित्य उद्देग युक्त मन,
_ अत्यन्त मलिन और जीणं [ मान० ] [ ० चं० ] । भिक्षा से भोजन, मलिन पुरानाः
वस्त्र धारण. करने वाला [ जा० पारि० ] ।
सूर्य मंगल बुध शुक्र शनि-व्याधि ओर शत्रुओं से युक्त, अपने स्थान से भ्रष्ट,
भूखा रहने वाला, विकल [मान०] (ल० च०) ! श्रेष्ठ, अति दुःख, भय और रोगों से
युक्त, क्षुधातं ( जा० पारि० ) ।
सूय मंगल गुरु शुक्र शनि-बड़ा विद्वान्, विचार पूवंक काम करने वाला, लोहा
आदि धातु, यन्त्र (मशीन आदि) विद्या में और रसायन के काम में प्रसिद्ध (मान०) ।